वित्त मंत्रालय ने सेना के अधिकारियों और जवानों की MSP की मांग को ठुकराया, सैन्य मुख्यालय ने दोबारा विचार करने को कहा




न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (5 दिसंबर):  सेनाओं की लंबे समय से चली आ रही मिलिट्री सर्विस पे यानी एमएसपी बढ़ाने की मांग को वित्त मंत्रालय ने खारिज कर दिया है। सरकार ने  सैन्य मुख्यालय ने अपने फैसले पर दोबारा विचार करने को कहा है। इस फैसले का असर 1.12 लाख सैन्य कर्मियों पर पड़ेगा। इनमें 87,646 जूनियर कमीशंड अफसर (जेसीओ) और समान रैंक वाले नौसेना और वायुसेना के 25434 अफसर भी शामिल हैं।  बताया जा रहा है कि  इस बात से सेना में काफी नाराजगी है।



अभी एमएसपी की दो श्रेणियां हैं - एक अधिकारियों के लिए और दूसरी जेसीओ एवं जवानों के लिए। सातवें वेतन आयोग ने जेसीओ और जवानों के लिए मासिक एमएसपी 5,200 रुपए तय की थी जबकि लेफ्टिनेंट रैंक और ब्रिगेडियर रैंक के बीच के अधिकारियों के लिए एमएसपी के तौर पर 15,500 रुपए तय किए थे। यदि सरकार ने मांग मान ली होती तो इस मद में हर साल 610 करोड़ रुपए खर्च होते। सैनिकों की विशिष्ट सेवा स्थितियों और उनकी मुश्किलों को देखते हुए सशस्त्र बलों के लिए एमएसपी की शुरुआत की गई थी। एक सूत्र ने बताया, "जेसीओ और नौसेना एवं वायुसेना में इसकी समकक्ष रैंक के लिए उच्चतर एमएसपी के प्रस्ताव को वित्त मंत्रालय ने खारिज कर दिया है।


जानकारी के मुताबिक थलसेना ने रक्षा मंत्री के सामने इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाया था। तीनों सेनाओं और रक्षा मंत्रालय का इस मामले में एक ही रुख है। एमएसपी की शुरुआत पहली बार छठे वेतन आयोग ने की थी। यूरोपीय देशों में सशस्त्र बलों के जवानों के लिए एमएसपी की अवधारणा काफी प्रचलित है। सशस्त्र बल जेसीओ और इसके समकक्ष रैंकों के लिए एमएसपी की अलग राशि तय करने की मांग कर रहे थे। पिछले साल नवंबर में थलसेना ने साफ किया था कि जेसीओ राजपत्रित अधिकारी होते हैं। थलसेना ने सात साल पुराने उस नोट को भी खारिज कर दिया था जिसमें उन्हें ‘अराजपत्रित' अधिकारी करार दिया गया था।