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उत्तराखंड से राष्ट्रपति शासन हटाने संबंधी हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट की रोक

नई दिल्ली (22 अप्रैल): उत्‍तराखंड में राष्‍ट्रपति शासन हटाने संबं‍धी हाई कोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगाई। अब इस मामले में अगली सुनवाई 27 अप्रैल को तय की गई है।

सुप्रीम कोर्ट की दो जजो की बेंच जस्टिस दीपक मिश्रा और शिव कीर्ति सिहं ने केंद्र सरकार की तरफ से दायर उत्तराखंड कोर्ट के फैसले पर सुनवाई करते हुए कहा कि 26 अप्रैल तक उन्हें हाईकोर्ट के आदेश की कॉपी मुहैया कराई जाए। जब तक उन्हें कापी नहीं मिल जाती है वहां पर मौजूदा हालात को ही बरकरार रखा जाए।

केंद्र की तरफ से आज सुबह सुप्रीम कोर्ट के सामने एक अर्जी दायर की गई। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र के वकील से कहा कि रजिस्ट्रार चीफ जस्टिस से पूछकर ही तय करेंगे कि कब होगी सुनवाई। 

बता दें कि गुरुवार को उत्तराखंड हाईकोर्ट ने प्रदेश में लगाए गए राष्‍ट्रपति शासन को हटाने का आदेश दिया था। जिसके बाद केंद्र सरकार ने शुक्रवार को हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष चुनौती दी।

केंद्र सरकार की ओर से उठाए गए सवाल बता दें कि केंद्र सरकार की ओर से उत्तराखंड हाईकोर्ट के फैसले पर ये सवाल उठाए गए-

हाईकोर्ट का आदेश सही नहीं है और उसे राष्ट्रपति शासन पर सुनवाई का अधिकार नहीं है जोकि मंत्रिमंडल की सलाह और तथ्यों पर लिया गया।  

हाईकोर्ट कहता है कि भ्रष्टाचार सहा नहीं जाएगा, लेकिन उसने यह आदेश जारी कर याचिकाकर्ता को राहत दी जिस पर स्टिंग ऑपरेशन में हार्स ट्रेडिंग और घूस के आरोप लगे हैं।

सुप्रीम कोर्ट के बोम्मई जजमेंट के आधार पर हाईकोर्ट के पास राष्ट्रपति शासन पर सुनवाई के लिए सीमित अधिकार हैं, हाईकोर्ट ने इस मामले में अपने अधिकार से बाहर आदेश दिया है, वह राष्ट्रपति के संतुष्ट होने पर फैसला नहीं कर सकता।

हाईकोर्ट मंत्रीमंडल की राष्ट्रपति शासन लगाने की सलाह की सत्यतता और वैधता पर सुनवाई नहीं कर सकता।

हाईकोर्ट ने 21 अप्रैल को आदेश सुनाया लेकिन लिखित आदेश नहीं दिया।

हाईकोर्ट ने यह फैसला हरीश रावत के गलत और छुपाए हुए तथ्यों के आधार पर दिया है, जो गलत है।

हाईकोर्ट का यह कहना भी गलत है कि बजट बिल पास नहीं होने पर सरकार नहीं गिरती बल्कि सरकार को इस्तीफा देना होता है। कानून के मुताबिक, बजट बिल के फेल होते ही सरकार गिर जाती है।

हाईकोर्ट ने विधायको की खरीद फरोख्त की स्टिंग पर गौर नहीं किया जबकि यह एक बड़ा आधार है।

AG ने कोर्ट में कहा है कि आदेश की कॉपी नहीं होने से अपंग हो गए हैं। ऑर्डर की कॉपी आने के बाद सुनवाई की जाए।

हाईकोर्ट की कॉपी मिलने तक आदेश पर रोक लगाई जाए।

 

 

 


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