सऊदी अरब ने ऐसे फिल्मी अंदाज में कराया खशोगी का मर्डर, हत्यारे कर गए ये गलती


न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (23 अक्टूबर): 
इस्तांबुल में इस्तांबुल में सऊदी अरब के वाणिज्यिक दूतावास में पत्रकार जमाल खशोगी का मर्डर बेहद ही फिल्मी अंजाद में किया गया। खशोगी तुर्की में रहने वाली अपनी मंगेतर हैतिस संगीज से शादी करना चाहते थे और इसी से जुड़े कुछ कागजात लेने वे सऊदी दूतावास गए थे, लेकिन सऊदी अरब दूतावास में उनका मर्डर पहले से बनाई गई प्लानिंग के साथ किया गया। खशोगी ने इसके लिए पहले से आवेदन किया था और एक अधिकारी ने उनको हत्या वाले दिन फोन करके बुलाए था।

खशोगी के साथ उनकी मंगेतर हैटिस भी साथ थी, लेकिन खशोगी अपने दोनों मोबाइल उनके पास छोड़कर और कुछ देर में आने बात कहकर अंदर चले गए। करीब 5 घंटे इंतजार करने के बाद जब खशोगी बाहर नहीं आए तो हैतिस ने तुर्की पुलिस को फोन किया। तुर्की पुलिस के मुताबिक उसने दूतावास के बाहर लगे कैमरे की फुटेज शाम को साढ़े पांच बजे देखी, जिससे साफ़ हो गया कि जमाल खशोगी दूतावास से बाहर नहीं निकले हैं।

ऐसे रची गई साजिश
उस दिन का एक सीसीटीवी फुटेज सामने आया है, जिससे हत्या के बाद भ्रम पैदा करने के लिए अपनाए गए तरीकों का पता चलता है। तारीख थी 2 अक्टूबर 2018, सुबह के 11.03 बजे शर्ट और जींस पहने एक शख्स अपने कुछ साथियों के साथ दूतावास में दाखिल होता है। 2 घंटे के बाद दोपहर 1.14 मिनट पर पत्रकार जमाल खशोगी कांसुलेट में प्रवेश करते हैं और कुछ ही मिनटों में दूतावास के भीतर खूनी खेल खेला जाता है।  

रिपोर्ट के मुताबिक 2 अक्टूबर को सऊदी के वाणिज्यिक दूतावास के भीतर जाने के दो मिनट के बाद ही खशोगी पर हमला किया गया और सात मिनट के भीतर उनकी मौत हो गई। इतना ही नहीं, 22 मिनट के अंदर ही उनके शरीर के अंगों के टुकड़े कर दिए गए। तुर्की के अधिकारियों ने भी कहा है कि पत्रकार की हत्या के लिए सऊदी टीम अपना काम करके दो घंटे से भी कम समय में वहां से रवाना हो गई थी।

बॉडी डबल का भी किया गया इस्तेमाल
सीसीटीवी फुटेज से साफ पता चला है कि सऊदी अरब के हत्यारे एजेंटों ने भ्रम की स्थिति पैदा करने के लिए खशोगी के एक बॉडी डबल का इंतजाम किया था। हत्या के बाद उसे खशोगी के कपड़े पहना दिए गए जिससे लगे कि पत्रकार दूतावास से चले गए थे। कुछ समय तक इस हत्या को कवर-अप किया गया पर एक जूते ने पोल खोल दी। खशोगी के कपडे़ जिसे पहनाए गए थे वह बिल्कुल पत्रकार की तरह दिखता है। चश्मे और दाढ़ी भी उनके जैसी ही थी। उम्र और शरीर देख कोई नहीं कह सकता कि यह खशोगी नहीं हैं, पर जूते ने अंतर को साफ कर दिया।


नकली शख्स की हुई पहचान
नकली शख्स की पहचान मुस्तफा-अल-मदनी के तौर पर हुई है। आरोप है कि वह सऊदी की जांच टीम का हिस्सा था, जिसे खशोगी को मारने के लिए दूतावास में भेजा गया था। मदनी की उम्र 57 साल की है। पहले जब मुस्तफा दूतावास के अंदर गया था, उसकी दाढ़ी नहीं थी। वह दूसरे कपड़े पहने हुए था। उसने स्पोर्ट शू पहन रखे थे लेकिन मुस्तफा ने एक चूक कर दी। उसने खशोगी के कपड़े तो पहन लिए और दाढ़ी भी रख ली, पर उसने जूते नहीं बदले। वह जो स्पोर्ट शू पहनकर अंदर गया था, उन्हीं में वापस निकला। खशोगी फॉर्मल काले रंग के जूते पहनकर अंदर गए थे। इस फुटेज ने खशोगी मर्डर में तुर्की के जांचकर्ताओं को अहम सबूत दिए हैं।

जांच टीम सऊदी पहुंची
उधर, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वह तुर्की में सऊदी अरब के वाणिज्य दूतावास में पत्रकार जमाल खशोगी की मौत को लेकर खाड़ी देश के जवाब से संतुष्ट नहीं हैं। ट्रंप ने कहा है कि अमेरिकी अधिकारियों का एक समूह सऊदी अरब में है और जांचकर्ताओं का अन्य समूह तुर्की में है जो इस मामले पर जानकारियां एकत्र करने की कोशिश कर रहा है।