इस 19 साल की लड़की ने तोड़कर रख दिया दुनियाभर के पुरुषों का घमंड

नई दिल्ली ( 17 फरवरी ): हमेशा पुरुषों को घमंड रहता है कि वह ही केवल सबकुछ करते सकते हैं। लेकिन एक लड़की ने इसे गलत साबित कर दिया। 19 साल की पत्रकारिता की छात्र कैथरीन स्विट्जर को लंबी दूरी तक दौड़ना अच्छा लगता था। वह हमेशा सोचती कि महिलाएं मैराथन दौड़ में हिस्सा क्यों नहीं लेतीं? यह सोचकर कैथरीन ने अनाधिकारिक रूप से पुरुषों की क्रॉस कंट्री टीम के साथ प्रैक्टिस शुरू कर दी। इस दौरान उनकी मुलाकात 50 साल के अर्नी ब्रिग्स से हुई।

कैथरीन ने उनसे गुजारिश की कि वो बोस्टन मैराथन दौड़ना चाहती है। यह सुनकर अर्नी उबल पड़े कि यह आसान नहीं है। मगर, कैथरीन पर जुनून सवार था। वो रोज रात में 10 मील (करीब 16 किमी) दौड़ने लगी और अर्नी को मना ही लिया। इससे उत्साहित कैथरीन मैराथन रेस से तीन हफ्ते पहले रोजाना 26 मील दौड़ने लगी और फिर 5 मील दूरी और बढ़ा ली।

मैराथन रेस के लिए कैथरीन जब अमेच्योर एथलीट यूनियन के दफ्तर पहुंची तो उन्हें यह कहकर फॉर्म नहीं दिया कि वे महिला हैं। कैथरीन ने फॉर्म देख कहा कि 'इसमें तो लिंग वाला कॉलम नहीं है, इसलिए उन्हें दौड़ने से रोका नहीं जा सकता"। आखिरकार 19 अप्रैल 1967 को 261 नंबर के साथ कैथरीन मैराथन ट्रैक पर थीं। मैराथन के मक्का कहे जाने वाले बोस्टन मैराथन में 741 धावकों में कैथरीन पहली व एकमात्र महिला धावक थीं।

दौड़ शुरू होने के कुछ देर बाद ही कैथरीन ने सैकड़ों को पीछे छोड़ दिया, लेकिन तभी साथ दौड़ रहे पुरुष उन्हें रोकने लगे। किसी ने उन्हें पकड़कर जर्सी पर टंगा नंबर छीनने की कोशिश की। फिर देखते ही देखते खुद को पिछड़ता देख कई धावकों ने उनका रोस्ता रोकने की कोशिश की। मगर, कैथरीन ने हार नहीं मानी और अंतत: मैराथन रेस पूरी करने वाली पहली महिला का खिताब अपने नाम किया।