OMG! ... तो मोहल्ले गलियों में चलेगी ट्रेन

नई दिल्ली (23 अगस्त): बड़े शहरों में ट्रांसपोर्ट कई वजहों से प्रभावित होता रहता है। शुरुआत में इस सिस्टम को खड़ा करना बेहद चुनौतीपूर्ण होता है। फिर यह सुचारू रूप से चलता रहे, इसके लिए कई स्तर पर लोग काम करते हैं। नई ट्रांसपोर्ट तकनीक विकसित करने के लिए भी तमाम एक्सपर्ट्स नई खोज और रिसर्च करने में लगे रहते हैं। आपकी बता दें, इसी दिशा में काम करते हुए शहरी ट्रांसपोर्ट के लिए भारतीय रेलवे के एक इंजीनियर ने एक खास कॉन्सेप्ट खोजा है। ये कॉन्सेप्ट है- 'कैटरपिलर ट्रेन'। इस नए नवेले ट्रांसपोर्ट कॉन्सेप्ट पर दुनिया के जाने-माने तकनीकी संस्थान मैसाच्यूसेट इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी यानि MIT ने भी मुहर लगा दी है।

क्या है कैटरपिलर ट्रेन

- ऐसा दावा किया जा रहा है कि कैटरपिलर ट्रेन का कॉन्सेप्ट दिल्ली और मुंबई जैसे मेट्रो शहरों की ट्रैफिक समस्या के लिए एक स्थाई हल है।

- खास बात ये है कि इसमें मेट्रो ट्रेन के मुकाबले लागत लागत महज पंद्रहवां हिस्सा है। 

- इसके अलावा दिल्ली जैसे शहर में बढ़ती कारों के बीच छोटी-छोटी गलियों में लास्ट माइल कनेक्टिविटी देना मुश्किल हो गया है। - कैटरपिलर ट्रेन सिस्टम में पूरी की पूरी ट्रेन व्यवस्था सड़क के ऊपर ही बनाई जा सकती है। - आर्क के आकार में खंबे लगाकर इनके ऊपर रेल पटरी बिछाई जाएगी। - इन पटरियों पर 20 लोगों के बैठने के लिए डिब्बे चलाए जाएंगे। - खास बात ये है कि ये डिब्बे दोहरे स्तर पर चलेंगे। - आधे डिब्बे पटरियों पर लटक कर तो वहीं आधे डिब्बे पटरियों के ऊपर चलेंगे। - ये डिब्बे ऐसे होंगे कि इनमें चारों तरफ गेट होंगे और ये जीपीएस के जरिए आटोमेटेड तरीके से बिजली के जरिए चलेंगे। - इन डिब्बों में आठ जोड़ी छोटे पहिए लगे होंगे जो इस ट्रेन को चलाएंगे। - कैटरपिलर ट्रेन को ड्राइवर की जरूरत नहीं होगी और इसके स्टेशन दो पटरियों के क्रॉस सेक्शन पर भी होंगे। - डिब्बों में सिर्फ और सिर्फ बैठने की ही व्यवस्था होगी। - इन डिब्बों में यात्री के सामने स्क्रीन होगी जिसमें वो अपनी लोकेशन चुन सकेगा। - ट्रेन यात्री को उचित स्टेशन पर उतार देगी। अगर ट्रेन फुल है और किसी स्टेशन पर कोई यात्री उतर नहीं रहा है तो वो ट्रेन उस स्टेशन पर नहीं रुकेगी। - इससे यात्रियों को जल्दी पहुंचाने में मदद मिलेगी। इस ट्रेन को 100 किलोमीटर प्रति घंटे की औसत स्पीड पर चलाया जा सकता है। - रेलवे के अधिकारी और इंजीनियर अश्विनी कुमार ने अपने कॉन्सेप्ट को पेटेंट कराने के लिए अमेरिका और इंडिया में पेटेंट फाइल कर दिया है।

कैसे हुआ चयन

- रिपोर्ट के मुताबिक, रेलवे में IRTS अधिकारी अश्विनी कुमार उपाध्याय के कैटरपिलर ट्रेन के कॉन्सेप्ट को MIT ने चुना है। - क्लाइमेट कोलैब कॉन्टेस्ट में पॉपुलर कैटेगरी और जजेज च्वाइस दोनों में ही चुना गया है।  - अश्विनी कुमार के मुताबिक, कैटरपिलर ट्रेन का आइडिया उनको तब आया, जब वे सिंगापुर में एमआईटी की स्कॉलरशिप पर अपना रिसर्च पूरा कर रहे थे। - यहां पर उनकी मुलाकात एक अमेरिकन इंजीनियर एमिल जैकब से हुई। - दोनों ने डेढ़ साल में एक अनूठे कॉन्सेप्ट को लेकर काम किया और सामने आया कैटरपिलर ट्रेन का आइडिया।