नोटबंदी के बाद मोदी सरकार अब देश में बनाना चाहती हैं कैशलेस सोसाइटी

नई दिल्ली (24 नवंबर): 500 और 1000 के नोटों पर पाबंदी के बाद सरकार अब कैशलेश ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देने में जुटी है। इसी कड़ी में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आज तमाम बैंकों के बडे़ अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए चर्चा की। इस वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान उन्होंने तमाम बैंकों को ज्यादा से ज्यादा कैशलेश ट्रांजैक्शन को बढ़ाने देने की दिशा में काम करने के निर्देश दिए। इसके तहत नेटबैंकिंग, मोबाइल वॉलेट, ई-वॉलेट, प्रीपेड कार्ड, क्रेडिट, डेबिड के साथ-साथ ई-कॉमर्स ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देना है।

सरकार चाहती है कि भारत में भी कैशलेस सोसाइटी बने और यहां भी दुनिया के अन्य देशों की तरह वस्तु एवं सेवाओं की खरीदारी या उपयोग के लिए कैशलेस ट्रांजेक्शन हो। इसका संकेत वित्त मंत्री अरुण जेटली कई बार पहले भी ऐसा कह चुके हैं। दुनियाभर में कैशलेस का चलन बढ़ रहा है। इस समय दुनियाभर में नकदी में होने वाले ट्रांजेक्शन की औसत दर चार फीसदी है, जबकि भारत में इसकी औसत दर 12 फीसदी है। सरकार का प्रयास है कि यह एक अंक में आए।

कैशलेस ट्रांजेक्शन के बढ़ते चलन का जिक्र करते हुए जेटली ने कहा कि पहले मोबाइल फोन का जिक्र अमीर आदमी को लेकर होता था। आज मोबाइल कितनी सुविधाएं दे रहा है। कई चीजें डिजिटल हो गयी हैं। डिजिटल उपयोगकर्ताओं की संख्या बढ़ रही है।

नोटबंदी के बीच कैशलेस ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने 31 दिसंबर तक ई-वॉलेट और ई-कॉमर्स ट्रांजैक्शन पर किसी तरह का चार्ज नहीं लगाने का ऐलान किया है।