ग्राहकों के पैन डिटेल देने से ऐसे बचा रहे ज्वैलर्स

नई दिल्ली(22 फरवरी): नोटबंदी के बाद डिजिटल ट्रांजैक्शंस के जरिए गोल्ड की अधिक सेल्स हो रही थी, लेकिन अब करंसी की उपलब्धता बढ़ने और इलेक्ट्रॉनिक सेल्स के टैक्स अथॉरिटीज की नजर में आने के डर से गोल्ड की अधिकतर सेल्स कैश में होने लगी है।

- इंडस्ट्री से जुड़े ऐग्जिक्यूटिव्स ने बताया कि दो लाख रुपये से अधिक का गोल्ड कैश के जरिए खरीदने पर PAN की जानकारी देने से कस्टमर्स को बचाने के लिए कुछ जूलर्स खरीदारी को छोटे बिलों में बांट रहे हैं।

- ऑल इंडिया जेम ऐंड जूलरी ट्रेड फेडरेशन (GJF) के चेयरमैन नितिन खंडेलवाल ने बताया, 'कैश ट्रांजैक्शंस निश्चित तौर पर बढ़ी हैं क्योंकि सिस्टम में कैश फ्लो में सुधार हुआ है। नोटबंदी के बाद कुछ लोग गोल्ड खरीदने के लिए डिजिटल और बैंकिंग ट्रांजैक्शंस कर रहे थे क्योंकि कैश की कमी थी, लेकिन अब 40-45 पर्सेंट सेल्स कैश के जरिए हो रही है। हालांकि, हमने ऐसे मामले नहीं देखे हैं जिनमें कस्टमर्स को पैन कार्ड की जानकारी देने से बचाने के लिए अलग-अलग बिल बनाए गए हैं। अगर ऐसे मामले हमारे सामने आते हैं तो हम निश्चित तौर पर कदम उठाएंगे।'

- इंडस्ट्री के ऐग्जिक्यूटिव्स का कहना है कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) के 20 फरवरी से सेविंग एकाउंट से कैश विदड्रॉल की वीकली लिमिट बढ़ाकर 50,000 रुपये करने से कैश सेल्स में और बढ़ोतरी होगी। सेविंग बैंक अकाउंट से कैश विदड्रॉल की लिमिट 13 मार्च से पूरी तरह वापस ले ली जाएगी। मुंबई की मनुभाई जूलर्स के मैनेजिंग डायरेक्टर समीर सागर ने बताया, '65,000-70,000 रुपये की गोल्ड जूलरी की खरीदारी कैश में हो रही है।'

- इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि पैन की डिटेल्स देने से बचने के लिए कस्टमर्स अपनी खरीदारियों की संख्या बढ़ा सकते हैं। इंडस्ट्री के एक ऐग्जिक्यूटिव का कहना है, 'जूलर्स भी कस्टमर्स के लिए खरीदारी आसान बनाने के रास्ते खोजने की कोशिश करेंगे।' अप्रैल से दो लाख रुपये से कम की वैल्यू के गोल्ड की खरीदारी बढ़ने की उम्मीद है क्योंकि 1 अप्रैल से दो लाख रुपये से अधिक की जूलरी की खरीदारी पर 1 पर्सेंट का TCS (टैक्स कलेक्टेड ऐट सोर्स) लगेगा।

- फाइनैंस बिल 2017 के पास होने पर जूलरी को जनरल गुड्स के समान माना जाएगा। जनरल गुड्स की दो लाख रुपये से अधिक की कैश खरीदारी पर 1 पर्सेंट TCS लगता है। बिल में जूलरी की खरीदारी पर TCS लगाने के लिए 5 लाख रुपये की सीमा को समाप्त करने की बात है। इस वर्ष के बजट में तीन लाख रुपये से अधिक की कैश डीलिंग पर बैन लगाने और इसका उल्लंघन करने वालों पर समान रकम की पेनल्टी लगाने का प्रपोजल था। पेनल्टी कैश प्राप्त करने वाले व्यक्ति को चुकानी होगी।