नोटबंदी से पहले बैंक में कैश किया जमा तो नहीं छोड़ेगी मोदी सरकार

नई दिल्ली (14 सितंबर): अगर आप सोच रहे हैं कि मोदी सरकार नोटबंदी के समय में बैंक अकाउंट में अधिक पैसा डालने वालों पर शिकंजा कस रही है तो यह खबर आपको थोड़ा परेशान कर सकती है। क्योंकि टैक्स विभाग अब 8 नवंबर से पहले कैश डिपॉजिट करने वालों से वित्त वर्ष 2010-11 से अब तक के ब्योरों के बारे में सवाल कर रहा है।

टैक्स विभाग मकान खरीदने वाले ऐसे लोगों को भी नोटिस भेजे गए हैं, जिनकी ओर से घोषित खरीद मूल्य गाइडेंस वैल्यू से काफी कम पाया गया है। अगर टैक्स अधिकारियों को कोई जवाब नहीं मिला या जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया तो रीअसेसमेंट का आदेश दिया जाएगा।

टैक्स अधिकारियों के पास अधिकार है कि इनकम टैक्स एक्ट की धाराओं 147 और 148 के तहत वे ऐसी किसी भी कर योग्य आमदनी का असेसमेंट या रीअसेसमेंट कर सकते हैं, जिसका असेसमेंट नहीं किया गया हो। प्रॉपर्टी से जुड़े ट्रांजैक्शंस में टैक्स अधिकारियों ने गाइडेंस वैल्यू और डिक्लेयर्ड वैल्यू के अंतर पर फोकस किया है।

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने नोटबंदी के बाद ऑपरेशन क्लीन मनी अभियान शुरू किया था और बड़े कैश डिपॉजिट्स के ई-वेरिफिकेशन के लिए उसने 18 लाख लोगों की पहचान की थी। इनके अलावा साढ़े पांच लाख और लोगों की पहचान इस अभियान के दूसरे चरण में की गई है। सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज ऐसे लोगों और इकाइयों को पकड़ने के लिए डेटा एनालिटिक्स का सहारा ले रहा है, जिन्होंने पहले उचित मात्रा में टैक्स जमा नहीं किया था।