ATM के कैशलेस होने से आम आदमी परेशान, चेस्ट में भी पैसे की किल्लत

नई दिल्ली (18 अप्रैल): नोटबंदी के तकरीबन 16 महीने बाद एकबार फिर देश में कैश की भारी किल्लत हो गई है। देशभर के अधिकांश ATM पर नो कैश का बोर्ड लगा है। वहीं बैंक के चेस्ट में भी पैसे की कमी की खबरें आ रही है। आलम ये है कि कई जगहों पर बैंकों से भी लोगों को कैश नहीं मिल पा रहा है। त्यौहार और शादी-ब्याह के मौसम में कैश क्रंच की वजह से आम आदमी को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। देश के कम से कम 10 राज्यों में कैश की भारी कमी देखी जा रही है। इनमें बिहार, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, गुजरात, महाराष्ट्र समेत कई राज्यों से नकदी संकट की खबरें आ रही है। 

हालांकि, सरकार और रिजर्व बैंक का कहना है कि कैश की किल्लत नहीं है लेकिन कुछ राज्यों में सप्लाय में कमी आने से ऐसा हुआ है। सरकार का कहना है कि हालात सामान्य होने में अभी कुछ वक्त लग सकता है। वहीं विपक्ष ने इसे वित्तीय इमरजेंसी करार दिया है। हालात यह हैं कि लोगों को एक बार फिर से नोटबंदी के दिन याद आने लगे हैं।

वित्तीय सेवा सचिव राजीव कुमार का कहना है कि देश के विभिन्न हिस्सों में एटीएम नकदी की कमी 5 से सात दिनों में सामान्य हो जाएगी। वित्त मंत्रालय की ओर से जारी किए गए बयान के मुताबिक देश में पिछले तीन महीनों में मुद्रा की मांग में असाधारण उछाल देखा गया है। देश के जिन हिस्सों में मांग में यह असामान्य उछाल आया है।

नोटबंदी के समय वादा किया गया था कि 50, 100 रुपये के नोटों की आपूर्ति बढ़ाई जाएगी। 200 रुपये के नए नोट जारी हुए हैं, लेकिन उनकी संख्या कम है। सौ रुपये के पुराने नोट बैंकों को दिए जा रहे हैं जिसे बैंक इसलिए इस्तेमाल नहीं कर रहे कि ये नोट एटीएम में फंस जाते हैं। अभी एटीएम को 50 रुपये के लायक बनाया भी नहीं गया है।

ऐसे में बैंक सिर्फ व 2000 रुपये के नोट एटीएम में डाल रहे हैं, जो राशि के लिहाज से तो अधिक होते हैं, लेकिन संख्या में कम होते हैं। लोगों को 600 की जगह 1000 और 1200 रुपये की जगह 2000 रुपये निकालने पड़ रहे हैं। इससे ज्यादा निकासी होने के कारण एटीएम जल्दी खाली हो जाते हैं। यह स्थिति नवंबर, 2016 में नोटबंदी के बाद से ही चल रही है।