ऐसा रहा अमरिंदर का सफरनामा, कभी कांग्रेस छोड़ अकाली में हुए थे शामिल

नई दिल्ली (16 मार्च): चारों ओर से हावी होती मायूसी के बीच पंजाब की जीत कांग्रेस के लिए संजीवनी साबित हुई है। एक बार फिर जब वो सत्ता पर काबिज हुई है तो इसके पीछे कैप्टन अमरिंदर सिंह का अहम योगदान है। या यूं कहें कि इस जीत के नायक सिर्फ और सिर्फ अमरिंदर सिंह हैं तो शायद गलत नहीं होगा।

पटियाला राजघराने के अमरिंदर सिंह ने अपने करियर की शुरुआत सेना से की थी। बतौर कैप्टन 1965 का भारत-पाकिस्तान युद्ध लड़ने के बाद उन्होंने सेना छोड़ दी। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने कैप्टन अमरिंदर सिंह की

सियासत में एंट्री कराई।

1980 में पहली बार कैप्टन अमरिंदर सिंह कांग्रेस से लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंचे। 1984 में ऑपरेशन ब्लू स्टार के विरोध में इन्होंने लोकसभा के साथ-साथ कांग्रेस की सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया। 1985 में कैप्टन शिरोमणि अकाली दल में शामिल हो गए। 1992 में मोहभंग होने पर इन्होंने शिरोमणि अकाली दल पी यानि पंथिक के नाम से नई पार्टी बनाई। 1998 में एसएडी पी का कांग्रेस में विलय हो गया।

1980 : कांग्रेस से लोकसभा सांसद चुने गए

1984 : लोकसभा और कांग्रेस से इस्तीफा

1985 : शिरोमणि अकाली दल में शामिल

1992 : शिरोमणि अकाली दल से इस्तीफा

1992 : शिरोमणि अकाली दल (पंथक) का गठन

1998 : एसएडी (पंथक) का कांग्रेस में विलय))

इसके बाद से कैप्टन अमरिंदर सिंह लगातार कांग्रेस को मजबूत करने में जुटे रहे। 1999 से 2002 तक पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष रहे। 2002 से 2007 तक वो प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। 2008 में उन्हें पंजाब में चुनाव प्रचार कमेटी का चेयरमैन बनाया गया।2010 में वो एक बार फिर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष बने और 2013 तक इस पद पर रहे। 2013 से वो अब तक कांग्रेस की वर्किंग कमेटी में शामिल हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में अमृतसर लोकसभा सीट से बीजेपी के दिग्गज अरुण जेटली को हराकर वो संसद पहुंचे। 2017 के विधानसभा चुनाव के मद्देनजर 2015 में उन्हें एक बार फिर प्रदेश कांग्रेस की कमान सौंपी गई। एसवाईएल के मुद्दे पर 2016 में उन्होंने संसद की सदस्यता से इस्तीफा देकर अपना फोकस 2017 के चुनाव पर कर दिया। खुद पटियाला के साथ-साथ सीएम को चुनौती देने के इरादे से लंबी सीट से भी कैप्टन मैदान में कूदे। हालांकि लंबी में वो प्रकाश सिंह बादल से चुनाव हार गए। लेकिन कांग्रेस को जबरदस्त जीत दिलाने में कामयाब रहे।

1999-2002 : पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष रहे

2002-2007 : पंजाब के मुख्यमंत्री रहे

2008 : पंजाब चुनाव प्रचार कमेटी के चेयरमैन बने

2010-2013 : पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष रहे

2013-अब तक : कांग्रेस वर्किंग कमेटी में शामिल

2014 : अमृतसर से लोकसभा सांसद चुने गए

2015 : पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष बने

2016 : लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा दिया

2017 : पटियाला और लंबी सीट से उम्मीदवार

2017 : पटियाला सीट से जीते, लंबी सीट से हारे))

कैप्टन अमरिंदर सिंह अपने सियासी सफर में कई जीत दर्ज कर चुके हैं। कैप्टन 5 बार पंजाब विधानसभा का चुनाव जीत चुके हैं। तीन बार पटियाला शहरी सीट से जबकि समाना और तलवंडी साबो से एक-एक बार जीत दर्ज कर चुके हैं।

5 बार पंजाब विधानसभा का चुनाव जीते

3 बार पटियाला शहरी सीट से जीते

1 बार समाना सीट से विधायक बने

1 बार तलवंडी साबो सीट से चुनाव जीते))

पंजाब में कांग्रेस को शिखर तक पहुंचाकर अब कैप्टन दोबारा बतौर मुख्यमंत्री राज्य की सेवा करेंगे।