भारत के विरोधी देश पर कुदरत की मार, हर साल धंस रही है इसकी राजधानी

नई दिल्ली (24 जून): कहते हैं कि पाप का घड़ा धीरे-धीरे बढ़ता है, तो अब वो स्थिति चीन के सामने आ गयी है। चीन के पाप का घड़ा बढ़ चुका है। चीन की राजधानी बीजिंग पाप का बोझ सह नहीं पा रही है। नतीजतन बीजिंग की धरती हर साल 11 सेंटीमीटर धंसती चली जा रही है। बहुत जल्दी बीजिंग की धरती अपनी जगह से खिसक जायेगी और दो करोड़ लोगों का जीवन संकट में पड़ जायेगा। कथित विकासवाद और साम्राज्य विस्तार की महत्वाकंक्षा में डूबी चीनी सरकार इस अवश्यंभावी आपदा से कितनी भी आंख चुराने की कोशिश करे, लेकिन उसे अपने किये का अंजाम तो भुगतना ही पड़ेगा।  

भूमिगत जल के भयावह दोहन के कारण शहर की भूमिगत जिऑलजी नष्ट हो गई है। यह बात एक स्टडी में सामने आई है। सेटलाइट इमेज की स्टडी की बाद यह खुलासा हुआ है। खास कर पेइचिंग के सेंट्रल बिजनस डिस्ट्रिक्ट की स्थिति भयावह है। यह हर साल 11 सेंटिमीटर या चार इंच से ज्यादा नीचे धंस रहा है।'द गार्जियन'इस बारे में एक रिसर्च पेपर की कुछ बातें छापी हैं। जिसमें कहा गया है कि यदि नीचे धंसने का सिलसिला नहीं थमा तो बीजिंग के दो करोड़ से ज्यादा लोगों का जीवन खतरे में पड़ सकता है। इसके साथ ही रेलों के परिचालन पर खतरनाक असर पड़ सकता है।

यह स्टडी सात लोगों की एक टीम ने की है। स्टडी के तीन सदस्य चीनी ऐकडेमिक चेन मी, शिओजुआन और स्पेन के इंजिनियर रॉबेर्तो थॉमस ने 'द गार्जियन'को बताया है कि हमलोग इस मामले में और डिटेल जुटा रहे हैं कि नीचे खिसकने के कारण चीन के मैदानी इलाकों के महत्वपूर्ण इन्फ्रास्ट्रक्चर खास कर हाई स्पीड रेलवे पर क्या असर पड़ने जा रहा है। इन्होंने ईमेल के जरिए 'द गार्जियन' को बताया है कि चीन समतल मैदान पर है और यहां पानी सदियों से जमा हुआ था। भूमिगत जल के बेपरवाह दोहन के कारण पानी का स्तर लगातार नीचे जाता रहा। इससे भीतर की जमीन स्पंज की तरह सिकुड़ रही है।  

1990 के बाद यहां गगनचुंबी इमारतें, रिंगरोड्स और दूसरी तरह के डिवेलपमेंट बेपरवाह तरीके से हुए। प्राकृतिक असंतुलन के कारण कुछ इलाकों में धंसने की प्रक्रिया खतरनाक तरीके से बढ़ रही है। यहां की इमारतें और अन्य इन्फ्रास्ट्रक्चर खतरे में हैं। पूरे पेइचिंग में दसियों हजार पानी के कुएं हैं। ज्यादातर लोग इसका इस्तेमाल खेती और बागवानी में करते हैं। चीन के पर्यावरणविदों का कहना है कि कुएं के निर्माण को लेकर स्टेट रेग्युलेटरी सिस्टम है लेकिन यह प्रभावी नहीं है। पेइचिंग में इंस्टिट्यूट ऑफ पब्लिक ऐंड इन्वाइरनमेंट अफेयर्स के डायरेक्टर मा यून ने कहा कि इस मामले में कई नियम हैं लेकिन शक है कि इनका इस्तेमाल भी होता है।