दलित विरोधी है सुप्रीम कोर्ट- जस्टिस कर्णन

कोलकाता(12 फरवरी): कलकत्ता हाईकोर्ट के जज जस्टिस सीएस कर्णन ने फिर विवादित बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि ऊंची जाति के जज कानून अपने हाथ में ले रहे हैं। और अपनी ज्यूडिशियल पावर का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं।

- बता दें कि जस्टिस कर्णन को सुप्रीम कोर्ट की ओर से हाल ही में नोटिस दिया गया है। इसी पर उन्होंने कोर्ट के रजिस्ट्रार को लेटर लिखा है, जिसमें यह बात कही गई है। यह पहला केस था जब सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के मौजूदा जज को अवमानना का नोटिस भेजा था। 

- मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जस्टिस कर्णन ने चीफ जस्टिस जेएस खेहर की अगुआई वाली 7 जजों की बेंच पर सवाल उठाया है।

- उन्होंने अपने लेटर में लिखा, "मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस के रिटायरमेंट के बाद होनी चाहिए।"

- "अगर बहुत जल्दी हो तो मामले को संसद को रेफर किया जाना चाहिए।"

- "इस दौरान मेरे ज्यूडिशियल और एडमिनिस्ट्रेटिव वर्क मुझे वापस दिए जाने चाहिए।"

- जस्टिस कर्णन ने आगे लिखा, "मुझसे कोई स्पष्टीकरण लिया जाए इससे पहले बताना चाहता हूं कोर्ट को हाईकोर्ट के सिटिंग जज को सजा देने का हक नहीं है।"

- "ऑर्डर में इसका कोई लॉजिक साफ नहीं है। ऐसे में यह सुनवाई लायक नहीं है।"

- "यह ऑर्डर साफतौर पर बताता है कि ऊंची जाति के जज कानून अपने हाथ में ले रहे हैं और अपनी ज्यूडिशियल पावर का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं।"

- "यह एक एससी/एसटी (दलित) जज से छुटकारा पाने के लिए किया जा रहा है।"