CAG की फटकार, देरी से चलने वाली ट्रेनों पर सुपरफास्ट शुल्क क्यों ?

नई दिल्ली (23 जुलाई): लेट लतीफी के लिए मशहूर रेलवे को नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक यानी CAG फटकार लगाई है।  CAG  ने सुपरफास्ट ट्रेनों में यात्रियों से वसूले जाने वाले ज्यादा किराए पर सवाल उठाते हुए रेलवे से कहा है कि अगर गाड़ी समय पर नहीं चलती तो यात्रियों को सुपरफास्ट का किराया वापस किया जाना चाहिए। CAG ने अपनी रिपोर्ट में इस बात का खुलासा किया है कि रेलवे ने सुपर फास्ट ट्रेनों की सुविधा प्रदान किए बिना यात्रियों से सुपर फास्ट सेस वसूला और इस मद में रेलवे ने तकरीबन 11 करोड़ 17 लाखों रुपये की उगाही की। 

CAG रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर मध्य और दक्षिण मध्य रेलवे ने 2013-14 से 2015-16 के दौरान सुपरफास्ट ट्रेनों के नाम पर यात्रियों से ज्यादा किराया वसूला। संसद के दोनों सदनों में पेश एक रिपोर्ट में कहा गया है कि रेलवे में मौजूदा नियमों में एसी कोचों में वातानुकूलन की सुविधा नहीं सुलभ हो पाने पर किराए में शामिल प्रभार को वापस करने का प्रावधान है, जिसके तहत AC और गैर AC किराये के अंतर को यात्री को लौटाया जाता है लेकिन यात्रियों को सुपरफास्ट सेवा प्रदान नहीं किए जाने पर सुपरफास्ट के किराए को वापस करने का कोई प्रावधान नहीं है। 

रेलवे के नियम के अनुसार, ब्रॉड गेज लाइन पर यदि ट्रेन की औसत गति 55 किलोमीटर प्रतिघंटा तथा मीटरगेज लाइन पर 45 किलोमीटर प्रतिघंटा से अधिक है तो उसे सुपरफास्ट गाड़ी का दर्जा दिया जाता है तथा उसमें यात्रा करने पर प्रतियात्री 15 से लेकर 75 रुपये का सुपरफास्ट किराया लिया जाता है।