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मौत को मात देने वाले लेफ्टिनेंट की सियाचिन में पहली तैनाती

27 वर्षीय राजशेखर ने शनिवार को भारतीय सैन्य अकादमी में लेफ्टिनेंट के रूप में शपथ लिया। साथ ही उनकी पहली तैनाती सियाचीन में हुई है। राजशेखर की कहानी किसी चमत्कार से कम नहीं है। राजेशखर मौत को हराकर ये कामयाबी हासिल की है।

              प्रतीकात्मक तस्वीर

न्यूज24 ब्यूरो, नई दिल्ली ( 11 जून ): 27 वर्षीय राजशेखर ने शनिवार को भारतीय सैन्य अकादमी में लेफ्टिनेंट के रूप में शपथ लिया। साथ ही उनकी पहली तैनाती सियाचीन में हुई है। राजशेखर की कहानी किसी चमत्कार से कम नहीं है। राजेशखर मौत को हराकर ये कामयाबी हासिल की है। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक देहरादून सैन्य अस्पताल ने राजशेखर की मृत्यु की संभावना जता दी थी। क्योंकि अकादमी की एक रूटीन ड्रिल में चोटिल होने के बाद उनके कई अंग खराब हो गए थे।लेफ्टिनेंट राजशेखर तमिलनाडु के रहने वाले हैं। राजेश शेखर ने अखबार से कहा कि मैं अकादमी में पहला कदम अभ्यास में डिहाइड्रेट होने की वजह से अचानक गिर गया। चूंकि इस अभ्यास में कैडेट को अपनी पीठ पर भारी-भरकम सामान लेकर 10 किमी दौड़ना होता है। इसलिए गिरने के बाद भारी सामान के दवाब से मेरे शरीर को काफी नुकसान हुआ। राजेशखर को डॉक्टरों ने कहा था कि उनकी किडनी और लिवर 70 प्रतिशत तक खराब हो चुका है। जिसकी वजह से वह 18 दिन तक आईसीयू और 22 दिन एचडीयू वार्ड में रहे।राजशेखर का प्रारंभिक जीवन भी चुनौतीपूर्ण रहा। क्योंकि 2005 में उन्होंने अपने पिता को खो दिया। जिसके बाद उनकी मां ने राजशेखर और उनके भाई का पोषण करने के लिए कपड़े सिलने का काम किया। राजशेखर की पहली तैनाती 12 असम राइफल में दुनिया के सबसे ऊंचे युद्ध क्षेत्र सियाचिन में हुई है। उनका कहना है कि यह चुनौती मौत को हराने के सामने कुछ भी नहीं है और मैं नई चुनौतियों के लिए बिल्कुल तैयार हूं।


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