अब इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों-चैक के जरिये मिलेगा वेतन, ऑर्डिनेंस को कैबिनेट की मंजूरी

नई दिल्ली (21 दिसंबर): डिजिटल इंडिया और कैशलेस इकोनॉमी को बढ़ावा देने के लिए केन्द्रीय कैबिनेट ने अहम फैसला लेते हुए 'पेमेंट ऑफ वेजेस' अध्यादेश को मंजूरी दे दी है। इस अध्यादेश के लागू होने के बाद 10 से ज्यादा कर्मचारी रखने वाली कंपनी को अपने कर्मचारियों को वेतन चेक या इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से देना अनिवार्य हो जाएगा।

वेतन भुगतान (संशोधन) विधेयक, 2016 के तहत मूल कानून की धारा छह में संशोधन का प्रस्ताव है जिससे नियोक्ता अपने कर्मचारियों को उनके वेतन का भुगतान चेक से या इलेक्ट्रॉनिक तरीके से उनके बैंक खाते में डालकर कर सकेंगे। पिछले दिनों नोटबंदी पर हंगामे के बीच श्रम मंत्री बंडारू दत्तात्रेय ने संसद में यह विधेयक पेश किया था। इसके तहत राज्य सरकारें ऐसे उद्योग या प्रतिष्ठान तय कर सकती हैं जो वेतन देने के लिए नकदीरहित तरीके का इस्तेमाल करते हैं।

विधेयक में कहा गया है कि यह नई प्रक्रिया डिजिटल और कम नकदी वाली अर्थव्यवस्था के उद्देश्य को पूरा करती है। यह कानून 23 अप्रैल, 1936 को अस्तित्व में आया था। इसके तहत वेतन का भुगतान सिक्के और मुद्रा नोटों या दोनों में किया जा सकता है। इसमें वेतन का भुगतान चेक या बैंक खाते के जरिये करने के प्रावधान को 1975 में शामिल किया गया। फिलहाल इस कानून के दायरे में प्रतिष्ठानों के कुछ श्रेणियों के वे कर्मचारी आते हैं जिनका वेतन 18,000 रपये मासिक से अधिक नहीं है।

केंद्र सरकार वेतन भुगतान के बारे में रेलवे, हवाई परिवहन सेवाओं, खान, तेल क्षेत्र और स्वयं के प्रतिष्ठानों के मामले में नियम बना सकती है। अन्य मामलों में राज्यों को फैसला करना होता है। कानून में राज्य स्तर पर संशोधन के जरिये आंध्र प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, केरल और हरियाणा ने पहले ही चेक और इलेक्ट्रॉनिक तरीके से वेतन भुगतान का प्रावधन कर दिया है। फिलहाल कर्मचारी से लिखित में लेकर उसका वेतन चेक के जरिये या उसके खाते में सीधे डाला जा सकता है।