मानव तस्करी विरोधी बिल को कैबिनेट की मंजूरी, लिप्त पाए जाने पर 10 साल की सजा और 1 लाख का जुर्माना

नई दिल्ली ( 28 फरवरी ): एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग बिल को सरकार की ओर से मंजूरी दे दी गई है। कैबिनेट बैठक में ट्रैफिकिंग ऑफ पर्संस (प्रीवेंशन, प्रोटेक्‍शन एंड रिहैबिलेटेशन) बिल 2018 को मंजूरी दे दी गई है। इस बिल के तहत अब देश में बढ़ती मानव तस्‍करी को रोकने में मदद मिल सकेगी।

इस बिल को कैबिनेट से मंजूरी मिलने के साथ ही इस तरह के मामलों की सुनवाई के लिए स्‍पेशल कोर्ट बनाना और पीड़ितों की पहचान उजागर न करने और उनका पुनर्वास करने के लिए विशेष बजट का भी प्रावधान किया जा सकेगा। हालांकि अभी इस बिल को संसद में पेश किया जाना बाकी है। नए कानून में आईपीसी की धारा 370 से 373 तक तानव तस्‍करी, मानव तस्‍करी से पीड़ित व्‍यक्‍ति के शोषण, वेश्‍यावृत्‍ति के तहत बच्‍चों की खरीद फरोख्‍त शामिल है। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुषणा स्वराज की अध्यक्षता में मंत्रियों की समूह बनाया है जिसकी कई बैठकों के बाद बिल तैयार हुआ है। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने कहा कि इस बिल को तैयार करने से पहले पुलिस, एनजीओ और वकील से बात की गई है। उन्होंने कहा कि 3.50 लाख बच्चे देश में लापता हैं। 

विधेयक में यह प्रावधान दिए गए हैं.....

-यह विधेयक रोकथाम, बचाव तथा पुनर्वास की दृष्टि से तस्‍करी समस्‍या का समाधान प्रदान करता है।

-तस्‍करी के गंभीर रूपों में जबर्दस्‍ती मजदूरी, भीख मांगना, समय से पहले यौन परिपक्‍वता के लिए किसी व्‍यक्ति को रासायनिक पदार्थ या हारमोन देना, विवाह या विवाह के छल के अंतर्गत या विवाह के बाद महिलाओं तथा बच्‍चों की तस्‍करी शामिल है।

-व्‍यक्तियों की तस्‍करी को बढ़ावा देने और तस्‍करी में सहायता के लिए जाली प्रमाण--पत्र बनाने, छापने, जारी करने या बिना जारी किए बांटने, पंजीकरण या सरकारी आवश्‍यकताओं के परिपालन के साक्ष्‍य के रूप में स्‍टीकर और सरकारी एजेंसियों से मंजूरी और आवश्‍यक दस्‍तावेज प्राप्‍त करने के लिए जालसाजी करने वाले व्‍यक्ति के लिए सजा का प्रावधान है।

-पीड़ितों/गवाहों तथा शिकायत करने वालों की पहचान प्रकट नहीं करके गोपनीयता रखना। पीड़ित की गोपनीयता उनके बयान वीडियो कांन्‍फ्रेंसिंग के जरिए दर्ज करके बरती जाती है। (इससे सीमा पार और अन्‍तर राज्‍य अपराधों से निटपने में मदद मिलती है)

-समयबद्ध अदालती सुनवाई और पीडि़तों को वापस भेजना-संज्ञान की तिथि से एक वर्ष की अवधि के अन्‍दर।

-बचाये गये लोगों की त्‍वरित सुरक्षा और उनका पुनर्वास। पीडित शारीरिक, मानसिक आघात से निपटने के लिए पीडि़त 30 दिनों के अन्‍दर अंतरिम सहायता का हकदार है और अभियोगपत्र दाखिल करने की तिथि से 60 दिनों के अन्‍दर उचित राहत।

-पीड़ित का पुनर्वास अभियुक्‍त के विरूद्ध आप‍राधिक कार्रवाई शुरू होने या मुकदमें के फैसले पर निर्भर नहीं करता।

-पहली बार पुनर्वास कोष बनाया गया। इसका उपयोग पीड़ित के शारीरिक, मनोवैज्ञानिक और सामाजिक देखभाल के लिए होगा। इसमें उसकी शिक्षा, कौशल विकास, स्‍वास्‍थ्‍य देखभाल, मनोवैज्ञानिक समर्थन, कानूनी सहायता और सुरक्षित निवास आदि शामिल हैं।

-मुकदमों की तेजी से सुनवाई के लिए प्रत्‍येक जिले में विशेष अदालत।

-यह विधेयक जिला, राज्‍य तथा केन्‍द्र स्‍तर पर समर्पित संस्‍थागत ढांचा बनाता है। यह तस्‍करी की रोकथाम, सुरक्षा जांच और पुनर्वास कार्य के लिए उत्‍तरदायी होगा। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) गृह मंत्रालय के अंतर्गत राष्‍ट्रीय स्‍तर पर तस्‍करी विरोधी ब्‍यूरो के कार्य करेगा।

-सजा न्‍यूनतम 10 वर्ष सश्रम कारावास से आजीवन कारावास है और एक लाख रुपये से कम का दंड नहीं है।

-राष्‍ट्रीय और अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍तर पर संगठित गठजोड़ को तोड़ने के लिए संपत्ति की कुर्की जब्‍ती तथा अपराध से प्राप्‍त धन को जब्‍त करने का प्रावधान है।

-यह विधेयक अपराध के पारदेशीय स्‍वभाव से व्‍यापक रूप से निपटता है। राष्‍ट्रीय तस्‍करी विरोधी ब्‍यूरो विदेशी देशों और अंतरराष्‍ट्रीय संगठनों के अधिकारियों के साथ अंतरराष्‍ट्रीय तालमेल करेगा, जांच में अंतरराष्‍ट्रीय सहायता देगा,साक्ष्‍यों और सामग्रियों, गवाहों के अंतरराज्‍य, सीमापार स्‍थानातंरण में सहायता देगा और न्‍यायिक कार्यवाहियों में  अंतरराज्‍य और अंतरराष्‍ट्रीय वीडियो कांफ्रेंसिंग में सहायता देगा।