Budget 2022: बजट से एक दिन पहले क्यों पेश किया जाता है आर्थिक सर्वेक्षण? जानिए इसका महत्व

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बजट सत्र के पहले दिन सोमवार को संसद में आर्थिक सर्वेक्षण पेश करेंगी। आर्थिक सर्वेक्षण अर्थव्यवस्था का एक वार्षिक रिपोर्ट कार्ड है, जो प्रत्येक क्षेत्र के प्रदर्शन की जांच करता है और फिर भविष्य में किस तरह से काम करना है, इसका सुझाव देता है।

Budget 2022: बजट से एक दिन पहले क्यों पेश किया जाता है आर्थिक सर्वेक्षण? जानिए इसका महत्व
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नई दिल्ली: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बजट सत्र के पहले दिन सोमवार को संसद में आर्थिक सर्वेक्षण पेश करेंगी। आर्थिक सर्वेक्षण अर्थव्यवस्था का एक वार्षिक रिपोर्ट कार्ड है, जो प्रत्येक क्षेत्र के प्रदर्शन की जांच करता है और फिर भविष्य में किस तरह से काम करना है, इसका सुझाव देता है।


संसद के दोनों सदनों में राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद के पारंपरिक संबोधन के तुरंत बाद उनका सर्वेक्षण पेश किया जाएगा। यह उम्मीद की जाती है कि आर्थिक सर्वेक्षण अगले वित्तीय वर्ष के लिए लगभग 9 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान लगाते हुए एकल खंड में होगा।


आर्थिक सर्वेक्षण कौन तैयार करता है?
महत्वपूर्ण दस्तावेज मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) द्वारा तैयार किया जाता है, लेकिन इस साल यह प्रमुख आर्थिक सलाहकार और अन्य अधिकारियों द्वारा किया गया है, क्योंकि कृष्णमूर्ति सुब्रमण्यम का कार्यकाल दिसंबर में समाप्त हो गया था।


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आर्थिक सर्वेक्षण पिछले कुछ वर्षों में दो खंडों में प्रस्तुत किया गया है। अरविंद सुब्रमण्यम के सीईए के रूप में पदभार संभालने के बाद से यह प्रथा शुरू हुई और उनके उत्तराधिकारी केवी सुब्रमण्यम ने इसे जारी रखा। लेकिन इस साल सीईए का पद खाली होने के कारण सर्वेक्षण एकल खंड में होने की उम्मीद है।


इसे बजट से एक दिन पहले क्यों पेश किया जाता है?
भारत की आजादी के एक दशक से भी अधिक समय तक, आर्थिक सर्वेक्षण बजट के साथ प्रस्तुत किया गया था। 1964 में दोनों को अलग कर दिया गया था और आर्थिक सर्वेक्षण का अग्रिम रूप से अनावरण किया गया था।


यह प्रथा जारी है, क्योंकि सर्वेक्षण बजट को एक संदर्भ प्रदान करता है। यहां यह ध्यान देने योग्य है कि सरकार के लिए सर्वेक्षण प्रस्तुत करना अनिवार्य नहीं है और पहले खंड में प्रस्तुत सिफारिशें सरकार पर बाध्यकारी नहीं हैं।


आर्थिक सर्वेक्षण का क्या महत्व है?
बजट से पहले सबसे ज्यादा देखा जाना वाला आर्थिक सर्वेक्षण अगले वित्त वर्ष के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का प्रजेक्शन है। इसमें देश की आर्थिक स्थिति में महत्वपूर्ण अंतर्दृष्टि शामिल है।


आशावाद की किरण के रूप में देश महामारी के प्रभाव से उबरता रहा है, जिसके चालू वर्ष के आर्थिक सर्वेक्षण में प्रमुखता से आने की संभावना है।


राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के अग्रिम अनुमानों के अनुसार, भारत की अर्थव्यवस्था चालू वित्त वर्ष के दौरान 9.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज करने की उम्मीद है, जोकि रिजर्व बैंक द्वारा अनुमानित 9.5 प्रतिशत से कम है।


आर्थिक सर्वेक्षण की विषय-वस्तु
हर आर्थिक सर्वेक्षण की एक थीम होती है। पिछले साल का विषय जीवन और आजीविका बचाना था। 2017-18 में, आर्थिक सर्वेक्षण गुलाबी था, क्योंकि विषय महिला सशक्तिकरण था।


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