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विदेश से कितने गिफ्ट पा सकेंगे आप, जल्द लिमिट तय करेगी सरकार !

चाइनीज गिफ्ट या यूं कहें तो चाइनीज ई-कॉमर्स कंपनियों की तरफ से भेजे जाने वाले गिफ्ट से अब आपको सावधान होने की जरूरत है। भारत सरकार इस सिलसिले में लिमिट तय करने पर गंभीरता से विचार कर रही है कि देश का हर नागरिक हर साल विदेश से कितने गिफ्ट पा सकता है।

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न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली( 12 जून):  चाइनीज गिफ्ट या यूं कहें तो चाइनीज ई-कॉमर्स कंपनियों की तरफ से भेजे जाने वाले गिफ्ट से अब आपको सावधान होने की जरूरत है। भारत सरकार इस सिलसिले में लिमिट तय करने पर गंभीरता से विचार कर रही है कि देश का हर नागरिक हर साल विदेश से कितने गिफ्ट पा सकता है। दरअसल, देश में ड्यूटी फ्री गिफ्ट पर कोई लिमिट नहीं है।

 अफसरों ने ऑफ द रिकॉर्ड बताया कि सरकार ने गिफ्ट से संबंधित कस्टम्स नॉर्म्स की समीक्षा शुरू कर दी है। आगामी बजट में इसमें बदलाव का ऐलान किया जा सकता है। यूनियन बजट 5 जुलाई को पेश होने वाला है। एक सरकारी अफसर ने बताया, 'नॉर्म्स का रिव्यू किया जा रहा है। तंत्र को सख्त बनाए जाने की जरूरत महसूस की जा रही है।

 लोग एक साल में कितनी बार विदेश से गिफ्ट पा सकते हैं, इसकी लिमिट लागू करने के लिए आधार या पासपोर्ट नंबर का यूज किया जा सकता है। कस्टम्स के मौजूदा नॉर्म्स के मुताबिक, किसी विदेशी नागरिक से कूरियर के जरिए 5,000 रुपये तक का फ्री सैंपल और गिफ्ट ड्यूटी फ्री पाया जा सकता है। कोई शख्स एक साल में कितनी बार विदेश से गिफ्ट पा सकता है, इसकी कोई लिमिट नहीं है।

विदेशी कंपनियां उठा रहीं बड़ा लाभ 

भारत में अनगिनत ड्यूटी फ्री गिफ्ट पाने की छूट का खासतौर पर चीन की तरफ से गलत फायदा उठाया जा रहा है। ईटी को सरकारी अधिकारी ने बताया कि कई मामले तो ऐसे हैं जहां लोगों के पास रोज ऐसे पैकेज आते रहते हैं। विदेशी ई-कॉमर्स कंपनियां इंपोर्ट ड्यूटी से बचने के लिए गिफ्ट रूट का इस्तेमाल कर रही हैं। इससे उन्हें कस्टम्स नॉर्म्स का पालन करने वाली कंपनियों पर गैरवाजिब कारोबारी बढ़त हासिल होती है।

केवाईसी नॉर्म्स सख्त करने पर भी विचार

लोकल ई-कॉमर्स कंपनियां पहले भी इस बारे में सरकार से शिकायत कर चुकी हैं। ऐसे पैकेज की डिलीवरी करने वाले कूरियर सर्विस प्रोवाइडर्स को पाने वाले का नो योर कस्टमर डिटेल चेक करना होता है। सरकारी अधिकारियों ने बताया कि लेकिन छोटी कूरियर कंपनियां अक्सर इन नॉर्म्स को नजरअंदाज कर देती हैं। इसलिए सरकार केवाईसी नॉर्म्स को भी सख्त बनाने पर विचार कर सकती है।

सूत्रों का कहना है कि अब तक संकीर्ण दायरे में होने वाली रेग्युलेटरी कार्रवाई का असर सीमित होने के चलते सरकार व्यापक नीति बनाने पर मजबूर हो रही है। इसी साल जनवरी में मुंबई जोन के कस्टम कमिश्नरेट की एक जोन ने केवाईसी नॉर्म्स का सही से पालन नहीं करने वाली कूरियर कंपनियों का रजिस्ट्रेशन कैंसल कर दिया था। उसने यह भी कहा था कि 5,000 रुपये की गिफ्ट वैल्यू में कूरियर चार्ज भी शामिल होगा। इस पर दूसरे प्वाइंट्स ऑफ एंट्री के जरिए ऐसे पैकेज की रीरूटिंग शुरू हो गई।

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