संन्यासी बजरंग दास हैं बूंदी के दशरथ मांझी, पहाड़ को काटकर बना दिया रास्ता

नई दिल्ली (6 सितंबर): पत्नी के मौत के बाद 22 साल तक रोजाना छैनी-हथौड़े से पहाड़ का सीना चीरकर रास्ता बनाने वाले बिहार के दशरथ माझी जैसी ही कहानी राजस्थान में बूंदी के लाल लंगोट वाले बाबा की है। राजस्थान के बूंदी जिले में संन्यासी बाबा बजरंग दास ने गांव के लोगों की परेशानी दूर करने के लिए पहाड़ को काट कर तीन सौ मीटर का रास्ता बना दिया था। इस रास्ते से आस-पास के दो दर्जन गांवों के लिए 40 किलोमीटर का रास्ता कम हो गया।

बाबा बजरंग दास ने भी सरकार का मुंह नहीं देखा और दर्जनभर गांवों के लोगों की राह आसान करने का बीड़ा उठाया। लोगों के सहयोग और मेहनत से मांडपुर घाटी को चीर डाला और 40 किलोमीटर लंबा रास्ता घटकर 3 किमी का रह गया। बाबा इन दिनों बूंदी में ही नृसिंह आश्रम में रहते हैं।    जयपुर से करीब 210 किमी दूर बूंदी के गेंडोली गांव में अरावली पर्वत श्रंखला का एक पहाड़ है। इस पहाड़ के कारण आस-पास के गांवों को दूसरी ओर जाने के लिए करीब 40 किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ता था। जो लोग पहाड़ चढ़ कर जाते थे, उन्हें और उनके मवेशियों को जान का खतरा रहता था।

गांव वालों के अनुसार 1980 में गांव के हनुमान मंदिर में आए बाबा बजरंग दास ने ऐसे ही एक हादसे में एक घोड़े की मौत के बाद पहाड़ काटने का बीड़ा उठाया। वे पहाड़ की चट्टानों को आग जला कर गर्म करते थे और फिर अपने सहयोगियों के साथ उन्हें तोड़ते थे। करीब 15 साल की मेहनत के बाद वे पहाड़ को काट कर बीस फुट चोड़ा और तीन सौ मीटर लंबा रास्ता बनाने में कामयाब हो गए।