रक्षा बजट में 7.81 फीसदी की बढ़ोत्तरी, 1962 के चीन युद्ध के बाद सबसे कम


नई दिल्ली ( 1 फरवरी ): वित्त मंत्री अरुण जेटली ने गुरुवार को आम बजट पेश कर दिया है। इसमें रक्षा बजट को 2.67 लाख करोड़ से मामूली बढ़ाकर 2.82 लाख करोड़ रुपए कर दिया है। ये 2018-19 के संभावित जीडीपी का लगभग 1.58 फीसदी है। ये 1962 के युद्ध के बाद अब तक का सबसे कम रक्षा बजट है। इससे पहले वित्त मंत्री जेटली ने अपने बजट संबोधन में देश की सीमाओं पर चुनौतियों से निपटने तथा जम्मू कश्मीर और पूर्वोत्तर दोनों जगह आंतरिक सुरक्षा माहौल को मैनेज करने में सशस्त्र बलों की भूमिका की सराहना की।  

रक्षा मंत्रालय ने वर्ष 2018-19 के प्रस्तावित रक्षा खर्च के नए आंकड़े जारी किए हैं। आंकड़ों के मुताबिक अगले वित्त वर्ष का रक्षा बजट 2.95 लाख करोड़ रुपये होगा। पिछले साल के मुकाबले रक्षा बजट इस साल 7.81 फीसदी बढ़ा है। इससे पहले वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि सरकार दो डिफेंस इंडस्ट्री प्रोडेक्शन कॉरिडोर का विकास करेगी और रक्षा उद्योग को बढ़ावा देने के लिए एक उद्योग के मुताबिक सैन्य उत्पादन नीति लेकर आएगी। उन्होंने कहा कि पिछले साढ़े 3 साल में रक्षा बलों की अभियानगत क्षमता को आधुनिक बनाने और मजबूत करने पर काफी जोर दिया गया है।

वित्त मंत्री जेटली ने कहा कि सरकार पब्लिक सेक्टर, प्राइवेट सेक्टर और एमएसएमई के जरिए घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए उद्योग अनुकूल ‘रक्षा उत्पादन नीति 2018’ भी लेकर आएगी। उन्होंने कहा कि देश को रक्षा जरूरतों के मामले में आत्मनिर्भर बनाने के वास्ते भारत की  डिफेंस प्रोडक्शन के विकास के लिए कई पहलें शुरू की गई हैं। रक्षा उत्पादन क्षेत्र में एफडीआई को उदार बनाने के साथ साथ प्राइवेट इनवेस्टमेंट के दरवाजे खोल दिए गए हैं।