सस्ती जेनेरिक दवा का वादा, लेकिन कहां मिलती हैं ये सस्ती दवाएं!

केजे श्रीवस्तन नई दिल्ली ( 1 फरवरी ): सरकार ने मेडिकल क्षेत्र में बड़े सुधार का एलान किया है जिसमें गुजरात और झारखण्ड में दो एम्स खोलने , वरिष्ठ नागरिकों को मेडकिल लुविधा के लिए स्पेशल कार्ड जारी करने और मेडिकल दवाईयों के लिए नए नियम बनाकर उसे सस्ता करने की बात कही है। साथ ही गरीबों का सहारा कहे जाने वाले जेनेरिक दवाईयों को और भी सस्ता करने के लिए ड्रग्स और काॅस्मेटिक नियम में बदलाव की बात कही है, लेकिन क्या सरकारी अस्पतालों से लिखी जाने वाली सभी जेनेरिक दवाईयां मिलती भी हैं।

इसका जायजा न्यूज़ 24 ने राजस्थान के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल SMS में जाकर लिया। सीकर जिले के निम थाना निवासी 85 साल के राम किशन 15 दिन में जयपुर आकर अपनी पत्नी का इलाज कराते हैं। हर महीने उनका 20 से 25 हजार रुपए किमोथेरेपी और दवाइयों पर खर्च होता है। लेकिन इनकी शिकायत यह है कि डाॅक्टरों द्वारा लिखी गईं कैंसर की दवाएं 12 से 15 हजार में मिल जानी चाहिए वह इन्हें नहीं मिल रही हैं। इनका कहना है कि इतना जरूर है कि इन्हें कुछ महंगी दवाईयां इनके बदले में सस्ते दर पर मिल जाती हैं।  

डॉक्टर ज्यादातर सस्ती जेनेरिक दवाईयां ही लिखते हैं लेकिन इन मरीजों का कहना है कि जब वे इन्हें लेने उपहार सरकारी दवा की दूकान पर जाते हैं तो इन्हें वह दवा वहां नहीं मिलती मजबूरन किसी दूसरे ब्रांड की दवा को महंगे दामों पर लेना पड़ता है।

दूकानदारों का कहना है कि ज्यादातर जेनेरिक दवाईयां उनके पास उपलब्ध हैं, लेकिन नहीं होने पर बदले में उन्हें मरीजों को दूसरी दवाईयां देनी ही पड़ती हैं।