मां की चिता को अग्नि देने वाली महिला सरपंच को भाई ने मार डाला

नई दिल्ली (6 अप्रैल): छत्तीसगढ़ में रूढ़िवादी परंपराओं को तोड़कर एक साहसिक कदम उठाने वाली महिला सरपंच को उसके ही भाई ने मार डाला। यह घटना मोहदा गांव की है।

मृतक महिला सरपंच का नाम गीता प्रहलाद बताया गया है। 46 वर्षीय गीता को उसके ही भाई तेजराम वर्मा ने केवल इसलिए मार डाला क्योंकि उसने परंपराओं को तोड़ते हुए अपनी मां की चिता को आग लगाई थी। यह हत्या तब की गई जब गीता अपनी मां की मौत के तीन दिन बाद रिवाज के तौर पर नदी पर नहाने के लिए गई थी। इस हत्या में तेजराम को उसके बेटे पीयूष ने भी मदद की।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, जब तेजराम और पीयूष ने गीता का पीछा किया तो वह अपनी जान बचाकर गांव वालों के सामने भागी। लेकिन दोनों ने उसपर कुल्हाड़ी से बार बार हमला किया। उन्होंने गीता के बेटे विक्रम और हस्तक्षेप करने पर बहन सीता पर भी हमला किया। दोनों को ही गंभीर चोटें आई हैं।

मोहदा गांव की रहने वाली गीता को 30 किलोमीटर दूर रायपुर अस्पताल ले जाया गया। लेकिन उसकी रास्ते में ही मौत हो गई। तेजराम और पीयूष को गिरफ्तार कर लिया गया है।

जांच अधिकारी अरुण देवका के मुताबिक, तेजराम ने बयान दिया है कि वह गीता के हाथों अपनी मां सरजूबाई का अंतिम संस्कार करने की बात से नाराज था। 

रिपोर्ट के मुताबिक, तेजराम ने एक पारिवारिक विवाद के बाद सालों पहले अपनी मां को छोड़ दिया। तब से वह अपनी बेटी गीता के साथ रह रही थी। अपनी मौत से पहले, सरजूबाई ने इच्छा जताई थी कि उसका अंतिम संस्कार उसकी बेटी करे। पिछले मंगलवार को उसकी मौत हो गई। तेजराम उसके अंतिम संस्कार में मौजूद नहीं था।

गांववालों के मुताबिक, स्थानीय मीडिया के इस घटना की तस्वीर के साथ खबर छापने से पहले तेजराम इतना बेचैन नहीं था। जब पड़ोसियों ने उसे बार बार ताना देना शुरू कर दिया, इससे उत्तेजित होकर उसने इस घिनौनी और क्रूर घटना को अंजाम दे दिया। 

भाई-बहनों में भी सम्पत्ति को लेकर विवाद चल रहा था। गीता के अलावा, तेजराम की दो बहनें और हैं। सरजूबाई के पास 7 एकड़ की जमीन थी। जो तेजराम के कब्जे में है। स्थानीय अदालत में जमीन की मालकियत को लेकर एक मामला दर्ज है।