ब्रिटिश संसद ने माना गिलगित-बाल्टिस्तान भारत का हिस्सा, पाक के खिलाफ प्रस्ताव पास

डॉ. संदीप कोहली,

नई दिल्ली (25 मार्च): गिलगित-बाल्टिस्तान में बन रहे चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर को लेकर भारत सरकार के रूख को ब्रिटिश संसद का साथ मिला है। ब्रिटिश संसद ने ऐतिहासिक कदम उठाते हुए एक प्रस्ताव पास कर गिलगित-बाल्तिस्तान पर पाकिस्तान के कब्जे को गैरकानूनी करार दिया है। पाकिस्तान की निंदा करते हुए प्रस्ताव में कहा गया है कि गिलगित-बाल्टिस्तान जम्मू-कश्मीर का अंग है और पाकिस्तान ने 1947 से इसपर गैरकानूनी तौर पर कब्जा कर रखा है। गौरतलब है कि हाल ही में पाकिस्तान से इस तरह की खबरें आई थी कि पाकिस्तान गिलगित-बाल्टिस्तान को अपना पांचवां सूबा घोषित करने वाला है।


गिलगित-बाल्टिस्तान के मुद्दे पर भारत को मिला ब्रिटेन का साथ-

    * कंजर्वेटिव पार्टी के सांसद बॉब ब्लैकमैन ने 23 मार्च को ब्रिटिश संसद में एक प्रस्ताव पेश किया।

    * प्रस्ताव में लिखा,पाकिस्तान ऐसे भूभाग पर कब्जा करने की कोशिश कर रहा है जो उसका नहीं है।

    * प्रस्ताव में गिलगित-बाल्टिस्तान को 5वां सूबा घोषित करने की तैयारी की भी आलोचना की गई।

    * संसद ने कहा गिलगित-बाल्तिस्तान भारत के जम्मू-कश्मीर का वैध और संवैधानिक हिस्सा है।

    * 1947 से ही इस गिलगित-बाल्तिस्तान पर पाकिस्तान ने गैरकानूनी तरीके से कब्जा जमा रखा है।

    * पाकिस्तान ने गिलगित-बाल्तिस्तान के लोगों को मूलभूत सुविधाएं तक मुहैया नहीं कराई हैं।

    * यहां तक कि गिलगित-बाल्तिस्तान में लोगों को अभिव्यक्ति की आजादी तक नहीं मिलती है।

    * प्रस्ताव में लिखा है कि इस इलाके में किसी भी तरह का बदलाव तनाव भड़काने जैसा होगा।


ब्रिटिश संसद में पास प्रस्ताव के क्या है मायने-

    * पहला- चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) के तहत यहां कोई भी कंस्ट्रक्शन अवैध है।

    * दूसरा- चीन ने पाकिस्तान के इस क्षेत्र में जो भी कंस्ट्रक्शन किया है वो बड़ा वॉयलेशन है।

    * तीसरा- CPCE की सुरक्षा के लिए चीन ने 24 हजार सैनिक तैनात करना बड़ा वॉयलेशन है।

    * चौथा- पूरे क्षेत्र की डेमोग्राफी में बदलाव की कोशिश स्टेट ऑब्जेक्ट ऑर्डिनेंस का वॉयलेशन है।

    * पांचवां- पाकिस्तान सरकार द्वारा किसी भी देश को इस क्षेत्र में जमीन देना वॉयलेशन है।


भारत सरकार ने गिलगित-बाल्टिस्तान पर अपनाया कड़ा रूख- गिलगित-बाल्टिस्तान में बन रहे चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर को लेकर भारत सरकार ने कड़ा रूख अपना लिया है। केंद्रीय मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह ने पाकिस्तान को दो टूक शब्दों में कह दिया है कि पीओके और गिलगित-बाल्टिस्तान पर पाकिस्तान का कब्जा अवैध है, जो उसे खाली करना ही होगा। डॉ जितेंद्र सिंह का यह बयान पाकिस्तान के उच्चायुक्त अब्दुल बासित द्वारा कश्मीर मुद्दे पर की गई टिप्पणी के बाद आया है। गुरूवार को पाकिस्तान के राष्ट्रीय दिवस पर बासित ने पाकिस्तान उच्चायोग में एक समारोह के दौरान कश्मीर का राग अलापते हुए कहा था कि कश्मीर समस्या का समाधान कश्मीरियो की अपेक्षा अनुरूप ही होना चाहिए। बासित ने आगे कहा कि कश्मीर की आजादी के लिए आवाज उठाने वालों ने आजादी के लिए जो संघर्ष किया है, वह खाली नहीं जाएगा। इस पर विदेश मंत्रालय ने कड़ी आपत्ति जताते हुए बासित को भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप ना करने के लिए चेताया था। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गोपाल बागले ने सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि पाकिस्तान के लिए बेहतर होगा कि वह अपने यहां फैल रहे आतंकवाद पर अंकुश लगाने पर ध्यान केंद्रित करे, जिसकी वजह से अन्य देशों के साथ उसके संबंध खराब हो रहे हैं।


गिलगित-बाल्टिस्तान को 5वां सूबा बनाने की तैयारी में पाकिस्तान- पाकिस्तान गिलगिट-बल्तिस्तान की आवाम को सबसे बड़ा धोखा देने वाला है। पाकिस्तान गिलगिट-बल्तिस्तान पर कब्जे की तैयारी कर रहा है। गिलगिट-बाल्टिस्तान जो अब तक पाक अधिकृत कश्मीर की तरह पाकिस्तान का ऑटोनॉमस रीजन यानी स्वायत्त क्षेत्र था अब पाकिस्तान इसे अपना पांचवां सूबा बनाने जा रहा है। पाकिस्तान के अंतर प्रांतीय समन्वय मंत्री रियाज हुसैन पीरजादा ने 14 मार्च को जियो टीवी को दिए इंटरव्यू में इसका खुलासा करते हुए बताया कि विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अजीज की अध्यक्षता में एक समिति ने गिलगित-बाल्तिस्तान को प्रांत का दर्जा देने का प्रस्ताव दिया है। समिति ने सिफारिश की है कि गिलगित-बाल्तिस्तान को पाकिस्तान का प्रांत बनाना चाहिए।


पाकिस्तान क्यों करना चाहता है गिलगिट बल्तिस्तान को 5वां सूबा घोषित- खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान ऐसा चीन के दबाव में कर रहा है और ये सब हो रहा है चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर यानी CPEC के लिए। चीन CPEC के तहत 3 हजार किमी का रेल-सड़क नेटवर्क तैयार कर रहा है। जो पश्चिमी चीन से दक्षिणी पाकिस्तान को जोड़ देगा। चीन का ये कॉरिडोर गिलगित-बाल्टिस्तान से गुजरता है। गिलगित-बाल्टिस्तान की जनता चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर का विरोध करती रही है। उनका आरोप है कि दोनों देश अपने-अपने फायदे के लिए इस इलाके के प्राकृतिक संसाधनों का दोहन कर रहे हैं। साथ ही चीन ने इलाके पर कब्जे के लिए अपने 21 हजार सैनिकों और हजारों कामगारों को यहां बसा रखा है। पिछले साल अगस्त में गिलगिट-बल्टिस्तान और पीओके के लोगों ने पाकिस्तान और चीन के खिलाफ बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन भी किए थे। जिसे पाकिस्तान ने दमनचक्र चलाकर कुचल दिया था।


गिलगिट-बाल्टिस्तान का इतिहास...

    * गिलगिट-बाल्टिस्तान 1846 से ही जम्मू-कश्मीर के डोगरा राजाओं के कब्जे में रहा है।

    * 1947-48 में पाकिस्तान ने कश्मीर के जिस हिस्से पर कब्जा किया उनमें गिलगिट-बल्टिस्तान भी है।

    * कब्जे वाले कश्मीर को दो हिस्सों में बांटा, जिनमें एक PoK और दूसरा गिलगिट-बल्टिस्तान बना।

    * पाकिस्तानी कब्जे वाले कश्मीर के इन दोनों हिस्सों को पाकिस्तान स्वायत्त क्षेत्र कहता है।

    * दोनों क्षेत्रों की अपनी-अपनी विधानसभाएं हैं और तकनीकी रूप से पाकिस्तान संघ का हिस्सा नहीं हैं।

    * जबकि हकीकत है कि दोनों क्षेत्रों में पाक सरकार और आर्मी की कठपुतली सरकारें ही काम करती हैं।

    * पाकिस्तान सुन्नी बहुल है जबकि गिलगित-बल्तिस्तान की आबादी शिया बाहुल्य है।

    * गिलगित बाल्तिस्तान की सीमाएं, चीन और अफगानिस्तान के अलावा जम्मू कश्मीर से जुड़ी हुई हैं।

    * चीन इस इलाके के खनिजों और पनबिजली संसाधनों के दोहन के लिए बड़े पैमाने पर निवेश किया।

    * पाकिस्तान के साथ मिलकर यहां रेल कॉरिडोर और अन्य प्रोजेक्ट लाया जिसे भारत ने अवैध बताया।

    * पाकिस्तान चीन की गतिविधियों का यहां के लोग जब भी विरोध करते हैं तो सेना इसे कुचल देती है।

    * चीन-पाकिस्तान गलियारे का विरोध करने वालों पर आतंकवाद रोधी कानून लगाया जाता है।


गिलगिट-बल्टिस्तान की शिया आबादी का हुआ दमन...

    * पाकिस्तान सुन्नी बहुल देश है जबकि गिलगित-बल्तिस्तान की आबादी शिया बाहुल्य है।

    * गिलगित-बल्तिस्तान में 60 फीसदी शिया बसते हैं 30 फीसदी सूफी और केवल 10 फीसदी सुन्नी हैं।

    * सबसे कट्टर इस्लामिक राष्ट्रपतियों में से एक जिया-उल हक ने मार्शल लॉ के दौर में यहां कत्लेआम मचाया।

    * 1982 के बाद से ही यहां सांप्रदायिक हिंसा का दौर जारी है।

    * 1988 में पाक सेना ने यहां कई शिया प्रदर्शनकारियों को जिंदा जला दिया था।

    * 1996 में बाहरी लोगों को बसाने का विरोध कर रहे शियाओं पर पाक सेना ने फायरिंग की।

    * यहां पहली बार 1994 में चुनाव हुए, जिसके बाद 26 सदस्यीय काउंसिल का गठन हुआ।

    * मार्च 1995 में काउंसिल के पास से कानून पारित करने का अधिकार छिन लिया गया।

    * क्योंकि काउंसिल में शिया बड़ी तादात में थे इसलिए उनसे अधिकार छिन लिए गए।


पूरे क्षेत्र की डेमोग्राफी बदलने में जुटा है पाकिस्तान...

    * गिलगित-बल्तिस्तान में पाकिस्तान के विरोध को देख पाक सरकार और सेना ने रणनीति बदली।

    * स्थानीय लोगों को अल्पसंख्यक बनाने की नीति के तहत साजिशे रची गई।

    * गिलगित-बल्तिस्तान की आबादी के संतुलन को पूरी तरह अपने पक्ष में कर लिया।

    * पाकिस्तान ने गिलगित और स्कर्दू में बड़े पैमाने पर बाहरी लोगों को जमीन आवंटित कीं।

    * यह यूनाइटेड नेशंस कमिशन फॉर इंडिया ऐंड पाकिस्तान के प्रस्तावों का उल्लंघन था।

    * बाहरी लोग (पाकिस्तानी) स्थानीय समुदायों की अपेक्षा आर्थिक तौर पर समृद्ध हैं।

    * सरकार और सेना के सहयोग से गिलगित-बल्तिस्तान के स्थानीय नागरिकों का उत्पीड़न कर रहे हैं।

    * 2001 की जनगणना के मुताबिक बाहरी और स्थानीय लोगों की जनसंख्या का अनुपात 3:4 हो गया।

    * बाहरी और स्थानीय लोगों की जनसंख्या का अनुपात 90 के दशक में 1:4 था।

    * पंजाबी और पख्तून मूल के लोगों की तेजी से बढ़ती आबादी के चलते स्थानीय लोग असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।