ब्रेक्ज़िटः कानूनी पेंंचीदगियों मेंं उलझ सकता है ब्रिटेन

नई दिल्ली (4 जुलाई): ब्रेक्ज़िट के बारे में अमरिकी विदेश मंत्री जॉन कैरी संभावना सही होती दिखाई दे रही है। लंदन की एक लॉ फर्म ने ब्रेक्ज़िट को कानूनी चुनौती देते हुए कहा है कि संसदीय अधिनियम के बिना इस प्रक्रिया को शुरू नहीं किया जा सकता। लॉ फर्म मिशकॉन डी रेया के वकीलों ने कहा है कि ब्रिटिश सरकार संसद में बहस के और इस प्रक्रिया पर मतदान के बिना यूरोपीय संघ को छोड़ने की कानूनी प्रक्रिया यानी अनुच्छेद 50 को लागू नहीं कर सकती।

मिशकॉन डी रेया में एक साझेदार कासरा नौरूजी ने कहा कि जनमत संग्रह के परिणाम पर कोई संदेह नहीं है लेकिन इसे लागू करने के लिए हमें एक ऐसी प्रक्रिया की जरूरत है, जो ब्रिटिश कानून के अनुरूप हो। उन्होंने कहा कि जनमत संग्रह का परिणाम कानूनी तौर पर बाध्यकारी नहीं है और मौजूदा या भावी प्रधानमंत्री की ओर से संसद की मंजूरी के बिना अनुच्छेद 50 को लागू किया जाना अवैध है। चूंकि अधिकतर लोग यूरोपीय संघ में ब्रिटेन के बने रहने के पक्ष में हैं। इसलिए ब्रिटेन का यूरोपीय यूनियन से अलग होना काफी मुश्किल हो सकता है। मिशकॉन डी रेया ने किसी का नाम लिए बिना कहा कि कानूनी प्रक्रिया के पीछे क्लाइंट्स समूह है। वहीं द लॉयर मैग्जीन ने कहा कि ये क्लाइंट्स दरअसल ब्रिटेन के कारोबारियों का एक समूह है जो ब्रेक्जि़ट का विरोध कर रहा है।