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सरकार ने कश्मीर के हुर्रियत नेताओं की सुरक्षा छीनी

पुलमावा में गुरुवार को सुरक्षाबलों के काफिले पर हुए हमले में 40 जवान शहीद हुए हैं इसके बाद से देश गुस्से में है। सरकार पर आतंकियों और उनके सरमायदारों के खिलाफ कार्रवाई का दबाव है। इस बीच सरकार ने बड़ा एक्शन लेते हुए हुर्रियत नेताओं की सुरक्षा वापस ले ली है

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली(16 फरवरी): पुलमावा में गुरुवार को सुरक्षाबलों के काफिले पर हुए हमले में 40 जवान शहीद हुए हैं इसके बाद से देश गुस्से में है। सरकार पर आतंकियों और उनके सरमायदारों के खिलाफ कार्रवाई का दबाव है। इस बीच सरकार ने बड़ा एक्शन लेते हुए हुर्रियत नेताओं की सुरक्षा वापस ले ली है। शुक्रवार को प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्युरिटी यानी सीसीएस की बैठक में पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब देने को लेकर कई फैसले हुए। डिंफेस से लेकर डिप्लोमेट लेवल पर पाकिस्तान की घेराबंदी करनी की बात कही गई। 

गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने श्रीनगर का दौरा भी किया था। गृहमंत्री ने कहा था कि पाकिस्तान और आईएसआई से आर्थिक मदद लेने वालों की सरकारी सुरक्षा पर भी नए सिरे से विचार किया जाएगा। राज्य सरकार की  रिपोर्ट के अनुसार, अलगाववादियों की सुरक्षा पर पिछले 5 साल में करीब 149.92 करोड़ रुपये सुरक्षा में तैनात निजी सुरक्षा गार्ड (पीएसओ) पर खर्च किए गए। अलगाववादियों की सुरक्षा पर केंद्र सरकार भी बड़ी मात्रा में खर्च करती है। घाटी के अलगाववादी नेताओं पर खर्च का ज्यादातर हिस्सा केंद्र सरकार उठाती रही है। इस खर्च में महज 10 फीसदी हिस्सा राज्य सरकार और शेष 90 फीसदी केंद्र वहन करती है।एक रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 5 साल में 309.35 करोड़ रुपये अलगाववादी नेताओं की सुरक्षा में लगाए गए निजी सुरक्षा गार्ड  और अन्य सुरक्षा पर खर्च हो गए। इसके अलावा इनकी सुरक्षा में चलने वाली गाड़ियों पर डीजल के मद में 26.41 करोड़ खर्च किए गए। साथ ही 20.89 करोड़ इनके लिए होटल के इंतजाम पर खर्च किए गए।विधानसभा में पेश आंकड़ों के मुताबिक श्रीनगर में सबसे ज्यादा 804 राजनीतिक कार्यकर्ता हैं जबकि जम्मू क्षेत्र में 637 और लद्दाख क्षेत्र में 31 नेता शामिल हैं।

- पिछले पांच साल में 309 करोड़ से ज्यादा खर्च किये हैं सरकार ने

- सुरक्षा वापस होने के बाद हुर्रियत नेताओं को सूंघ गया सांप

- राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को ही दिये थे सुरक्षा वापसी के संकेत

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