इन दो अफसरों में ढहा दी राम रहीम की सल्तनत

नई दिल्ली (27 अगस्त): भले ही राम रहीम को दोषी दिए जाने के बाद से ही उसके काले कारनामों की सच्चाई सामने आ रही है, लेकिन एक वक्त ऐसा भी था जब उसकी ताकत के आगे प्रभावशाली लोग भी सिर झुकाते थे। हालांकि राम रहीम की हकीकत सामने लाने में सीबीआई के दो जांबाज अफसरों ने अहम भूमिका निभाई।

सतीश डागर और तत्कालीन डीआईजी मुलिंजा नारायणन ने राम रहीम का पूरा का पूरा किला ही ढहा दिया। इन दोनों अधिकारियों ने कई तरह के दबाव झेले। सतीश डागर पर अधिकारियों और नेताओं का दबाव था। डेरा समर्थकों की ओर से उन्हें धमकी भी मिल रही थी, लेकिन डागर ने कमाल का साहस दिखाया और केस को अंजाम तक पहुंचाने में सफल रहे। सतीश ने ही पीड़ित साध्वी को खोज निकाला और उसे बयान दर्ज कराने के लिए तैयार किया।

2007 में सीबीआई के तत्कालीन डीआईजी मुलिंजा नारायणन को राम रहीम का केस बंद करने के लिए सौंपा गया था। मुलिंजा ने बताया कि जिस दिन उन्हें केस सौंपा गया था, उसी दिन उनके वरिष्ठ अधिकारी उनके कमरे में आए और साफ कहा कि यह केस तुम्हें जांच करने के लिए नहीं, बंद करने के लिए सौंपा गया है। मुलिंजा पर केस को बंद करने के लिए काफी दबाव था, लेकिन उन्होंने बिना किसी डर के मामले की जांच की और इस केस को आखिरी अंजाम तक पहुंचाया।