पहली बार सुखोई-30 से ब्रह्मोस मिसाइल का सफल परीक्षण, दु‍श्मनों के नापाक इरादे होंगे ध्वस्त

नई दिल्ली (23 नवंबर): ब्रह्मोस मिसाइल के जरिए भारत ने एक और मील का पत्थर स्‍थापित किया है। भारत ने पहली बार सुखोई 30 सुपरसोनिक एयरक्राफ्ट से इसका सफल प्रक्षेपण किया और ऐसा करने वाला भारत दुनिया का पहला देश है। 

ब्रह्मोस एक क्रूज मिसाइल है और इसकी रेंज 290 किमी है। इस लिहाज से भी यह काफी अहम है। मौजूदा समय में इस मिसाइल को थल, जल और वायु में से कहीं से भी छोड़ा जा सकता है। ब्रह्मोस रूस और भारत के ज्‍वाइंट वेंचर प्रोग्राम के तहत डेवलप की गई है। आपको बता दें कि भारत इस मिसाइल को पहले ही थल और नौसेना को सौंप चुका है। इनके बाद से ही इसके एयर वर्जन पर जोर दिया जा रहा था जिसका सफल प्रक्षेपण हो चुका है।

ब्रह्मोस मिसाइल जमीन के नीचे परमाणु बंकरों,कमांड ऐंड कंट्रोल सेंटर्स और समुद्र के ऊपर उड़ रहे एयरक्राफ्ट्स को दूर से ही निशाना बनाने में सक्षम है। इसकी खासियत यह भी है कि यह मिसाइल आम मिसाइलों के विपरित हवा को खींच कर रेमजेट तकनीक से ऊर्जा प्राप्त करती है।

क्षेपास्त्र तकनीक में दुनिया की कोई भी दूसरी मिसाइल तेज गति से आक्रमण के मामले में ब्रह्मोस की बराबरी नहीं कर सकती है। इसकी खूबियां इसे दुनिया की सबसे तेज़ मारक मिसाइल बनाती है। यहां तक की अमरीका की टॉम हॉक मिसाइल भी इसके आगे फेल साबित होती है। ब्रह्मोस की सफलता का आंकलन इस बात से भी लगाया जा सकता है कि भारत अब दूसरे देशों को बेचने की दिशा में काम कर रहा है। 

ब्रह्मोस बनाने वाली कंपनी ब्रह्मोस एयर प्रोग्राम कंपनी को करीब सात अरब डॉलर के घरेलू ऑर्डर मिल चुके हैं। यहां पर ध्‍यान देने वाली बात यह भी है कि अंतरराष्ट्रीय समझौतों के चलते 2016 से पहले इनका निर्यात नहीं किया जा सकता था, लेकिन एमसीटीआर (मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रिजाइम) में शामिल होने के बाद भारत को इनकी खरीद-फरोख्त का अधिकार मिल चुका है। इंडो-रसियन संयुक्त उपक्रम के तहत इसकी शुरुआत 1998 में हुई थी।