ब्रह्मोस मिसाइल की मारक क्षमता होगी ढाई साल में 800 किमी तक

नई दिल्ली ( 15 फरवरी ): रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की मारक क्षमता मौजूदा 290 किलोमीटर की दूरी से बढ़ाकर 450 किलोमीटर तक करने की तैयारी कर रहा है। डीआरडीओ प्रमुख एस. क्रिस्टोफर ने बुधवार को कहा कि इस मिसाइल की रेंज बढ़ाकर इसका परीक्षण 10 मार्च के आसपास किया जा सकता है। डीआरडीओ ने कहा कि अगले ढाई साल में इस मिसाइल की रेंज 800 किलोमीटर कर दी जाएगी।

पिछले साल अक्‍टूबर में ब्रिक्‍स सम्‍मेलन के दौरान भारत और रूस में ब्रह्मोस का उन्‍नत संस्‍करण बनाने को लेकर करार हुआ था। रूस, भारत के साथ मिलकर यह काम करने के लिए इसलिए राजी हुआ, क्योंकि भारत मिसाइल कंट्रोल रिजिम (MTCR) में शामिल हो गया था।

एमटीसीआर के नियम के मुताबिक इसमें शामिल देश किसी ऐसे देश के साथ मिलकर 300 किलोमीटर की रेंज से ऊपर की मिसाइल नहीं बना सकते जो इस ग्रुप में शामिल ना हों।

इस मिसाइल को पनडुब्बियों, जहाजों, विमान या भूमि से प्रक्षेपित किया जा सकता है। ब्रह्मोस रूस की एनपीओ माशीनोस्ट्रोयेनिया और भारत के डीआरडीओ का संयुक्त उपक्रम है।

मालूम हो कि ब्रह्मोस की रेंज 290 किलोमीटर है। भारत के पास मौजूद ब्रह्मोस सुपरसोनिक है यानी इसकी स्पीड करीब एक किलोमीटर प्रति सेकेंड है, जबकि चीन के पास मौजूद मिसाइल सबसोनिक यानी उसकी स्‍पीड 290 मीटर प्रति सेकेंड है। आम भाषा में समझे तो ब्रह्मोस चीनी मिसाइल से तीन गुना तेज है और इसे फायर करने में वक्त भी कम लगता है। साथ ही इसका निशाना चूकता नहीं है।

इसकी तैनाती के बाद अरुणाचल प्रदेश से चीन के 290 किलोमीटर के दायरे में आने वाली हर जगह इसकी पहुंच में होगी। यहां उन्‍नत ब्रह्मोस की तैनाती होगी जो पहाड़ों में छुपे दुश्मन के ठिकानों को भी निशाना बना सकता है। चीनी सेना के मुताबिक ब्रह्मोस की तैनाती से चीन के तिब्बत और युन्नान प्रांत खतरे की जद में आ जाएंगे।