अब BPL ही नहीं SECC का आंकड़ा भी होगा गरीबों के लिए सरकारी योजनाओं का पैमाना !



नई दिल्ली (4 जनवरी): नोटबंदी के बाद अब सरकार इसका फायदा आम लोग खासकर गरीब गर्वों तक पहुंचाना चाहती है। इसकी कड़ी में सरकार ने समाज कल्याण कार्यक्रमों को लागू करने के लिए ज्यादा वैज्ञानिक तरीका अपनाने की कवायद तेज कर दी है। ताकी जरूरत मंद लोगों का इसका ज्यादा से ज्यादा फायदा मिल सके। सरकार का मानना है कि इस कदम से इन योजनाओं के लाभार्थियों में से उन लोगों को अलग करने में आसानी होगी, जिन्हें इनकी जरूरत नहीं है और फिर गरीबी से जंग बेहतर ढंग से लड़ी जा सकेगी। गरीबों के लिए बनाई गई योजनाओं में लाभार्थियों की पहचान के लिए सरकार गरीबी रेखा पर आधारित तरीके के बजाय सोशियो इकनॉमिक एंड कास्ट सेंसस यानी SECC को अपनाएगी।


SECC 2011 में परिवारों की रैंकिंग उनकी सामाजिक- आर्थिक स्थिति के आधार पर की गई है ताकि राज्य सरकारों को गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों की सूची बनाने में आसानी हो। इससे विभिन्न जातियों और वर्गों के लोगों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति और उनके शैक्षिक स्तर के बारे में भी जानकारी मिलती है। ग्रामीण विकास मंत्रालय अपने नेशनल सोशल असिस्टेंस प्रोग्राम के लिए इस साल SECC 2011 के आंकड़ों का उपयोग करना शुरू करेगा।


इसके तहत SECC 2011 का उपयोग ग्रामीण इलाकों में गरीबों को पेंशन देने में किया जाएगा। इसके अलावा राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन में भी इस डेटा का उपयोग होगा। दोनों ही योजनाओं में अब तक BPL डेटा के जरिए गरीबों की संख्या का आकलन किया जाता रहा है। इससे जुड़े अधिकारियों के मुताबिक BPL बीपीएल डेटा से पता चलता है कि कितने लोग गरीब हैं। SECC बताता है कि कौन लोग गरीब हैं। यह सरकारी योजनाओं का लाभ देने में उचित व्यक्ति की पहचान करने का ज्यादा वैज्ञानिक तरीका है।