BPL कार्ड धारकों के बच्चों को मिलेगा प्राइवेट स्कूलों में एडमिशन- वसुंधरा सरकार

जयपुर (21 अप्रैल): वसुंधरा सरकार का एक फऱमान आया है , फऱमान के मुताबिक अब सिर्फ उन बच्चों का प्राइवेट स्कूलों में एडमिशन होगा जिनके पास बीपीएल कार्ड है। यानी लाखों गरीब परिवार जिनके पास बीपीएल कार्ड नहीं है, उनके बच्चे अब निजी स्कूलों में एडमिशन नहीं मिल पाएगा।

जयपुर की जावेदा प्राइवेट स्कूल में पढ़ती है। जावेदा का एडमिशन शिक्षा के अधिकार कानून के तहत हुआ है। मासूम जावेदा को ये अच्छा नहीं लगता कि उसके भाई-बहन और साथ के बच्चे अच्छे स्कूल में नहीं पढ़ रहे। वो चाहती है कि सभी बच्चे अच्छे स्कूलों में पढ़े। लेकिन जावेदा की इस मासूम सी ख्वाहिश का पूरा होना अब और मुश्किल हो जाएगा।

राजस्थान की वसुंधरा सरकार ने प्राइवेट स्कूलों पर एसी दरियादिली दिखाई है। इससे लाखों बच्चों का प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने का सपना पूरा नहीं होगा। पढ़-लिखकर आगे बढ़ने की चाहत लिये ये मासूम बच्चे शिक्षा के अधिकार के बावजूद अब अंग्रेजी मीडियम के निजी स्कूलों में नहीं पढ़ पाएंगे।

वसुंधरा सरकार के नए फैसले के मुताबिक आरटीई कानून के तहत अब सिर्फ उन बच्चों का प्राइवेट स्कूलों में एडमिशन होगा, जिनके पास बीपीएल कार्ड है। वहीं लाखों गरीब परिवार जिनके पास बीपीएल कार्ड नहीं है, उनके बच्चों को निजी स्कूलों में एडमिशन नहीं मिल पाएगा।

आरटीई कानून के तहत प्राइवेट स्कूलों में 25 फीसदी सीटें गरीब तबके के बच्चों के लिए आरक्षित है। ये वो बच्चे हैं जिनके परिवार की सलाना इनकम ढाई लाख रुपये से कम है। अबतक ओबीसी और पिछड़े वर्ग के बच्चे इनकम सर्टिफिकेट के तहत आवेदन करते रहे हैं। लेकिन नए फैसले के बाद लाखों बच्चे आवेदन ही नहीं कर पाएंगे, क्योंकि उनके पास बीपीएल कार्ड नहीं है।

वसुंधरा सरकार के नए आदेश को देखकर लगता है कि सरकार प्राईवेट स्कूल संचालकों पर कुछ ज्यादा ही मेहरबान है, लेकिन सरकार के मंत्री इससे सहमत नहीं। राजस्थान में 2002 के बाद नए पीपीएल कार्ड नहीं बने है। साफ है जो गरीब परिवार है और जिनके पास बीपीएल कार्ड नहीं है, उनके बच्चों का निजी अंग्रेजी मिडियम के स्कूलों में पढ़ने का सपना अब भी अधूरा ही रहेगा।