बोधगया में हाथी पहनेगा जूता

नई दिल्ली(13 अगस्त): फिल्मों और सर्कस में 'गजराज' यानि हाथी के कई कारनामे हम सभी ने देखा होगा। हाथी को पैरों में जूता पहने शायद ही किसी ने देखा होगा। लेकिन अब हाथी को उसके पैरों में जूता पहने बहुत जल्द ही लोग देख सकते हैं। बस ये नजारा देखने के लिए आपको इतना करना होगा। अंतर्राष्ट्रीय पर्यटक स्थल बोधगया की तरफ रूख करना होगा।

- बोधगया की सड़क पर जूता पहने हाथी को चलते हुए लोग देख सकेंगे। यह नजारा लोगों को विस्मय में जरूर डाल देगा। जो जल्द ही यहां दिखेगा। जूता पहने 'गजराज' की मतवाली चाल किसी लोक कथा के नायक के पात्र से कम नहीं होगा। इसके लिए एक संस्था ने पहल की है। जिसका नाम है- एशियन एलिफैंट रिहैबिटेशन एंड वाइल्ड लाइफ एनिमल ट्रस्ट (एरावत) है।

-'एरावत' ट्रस्ट के अध्यक्ष अख्तर इमाम जो हाथी के विशेषज्ञ है। उन्होंने कहा कि पक्की सड़कों पर चलने में हाथी को परेशानी होती है। और उसका प्रभाव उसके आंखों में देखा जा सकता है। एक जानकार होने के नाते उसका दर्द को हमने महसूस किया। और फिर इसके लिए जूता बनवाने की दिशा में पहल की। वे कहते हैं कि उनकी देखरेख में वैसे तो कई हाथी हैं। लेकिन मोती, रागिनी और बेटी। तीनों मेरे काफी करीब है। बेटी नामक हाथी अभी बोधगया में है। जो कम उम्र की है। उन्होंने कहा कि मोती और रागिनी के पैर के नाप काजूता बनकर तैयार है। बेटी के पैरों के माप ले लिया गया है। इसके लिए भी जूता बन रहा है।

- एक जोड़े जूते का वजन लगभग10 किग्रा है। जो चमड़े का बना हुआ है। इसके जूते बनवाने के लिए नालंदा जिले के बिहारशरीफ के एक कारीगर को राजी कराया गया। जो पहले हाथी के पैरों का नाप लिया। और तब जूता बनाने का काम शुरू हुआ।

- मोती और रागिनी के जूते बनने में लगभग छह माह लगे हैं। अब जाकर दोनों का जूता बनकर तैयार हुआ। इमाम बताते हैं कि जूते बनाने के आर्डर देने के बाद बराबर वे बन रहे जूते को देखने के लिए अक्सर आना जाना करते रहते थे। संकोच था। जब तैयार हो गया। तब सुकून मिला।

- फिलहाल इमाम बोधगया में दो ऊंट व एक हाथी रखे हैं। दोनों के देखभाल के लिए कई कर्मी भी हैं। समय-समय पर इमाम स्वयं बोधगया आकर हाथी व ऊंट की देखभाल करते रहते हैं। बड़े जानवरों से इनका प्रेम व लगाव यह दर्शाता है कि कहीं से बड़े जानवरों के बीमार होने की सूचना आती है। तो इमाम वहां के लिए तुरंत कूच कर जाते हैं।