हरियाणा में बैंकिंग चैनल के जरिए 1000 करोड़ को ऐसे किया गया व्हाइट

विशाल एंग्रीश, नई दिल्ली (18 जनवरी): हरियाणा के चरखी दादरी में 1000 करोड़ रुपए के ब्लैकमनी का खुलासा हुआ है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने पाया कि नोटबंदी के बाद यहां पर इस रकम को बैंकिंग चैनल के जरिए ‘लॉन्डरिंग’ की गई। इसमें एंट्री ऑपरेटर की पहचान हो गई, लेकिन मुख्य आरोपी का पता नहीं चला है।

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट (इन्वेस्टिगेशन विंग) की डीजी मधु महाजन ने कहा, ‘चरखी दादरी में हाल में 1000 करोड़ रुपए से ज्‍यादा रकम की हवाला के जरिए एंट्री का पता चला है।’ जांच में पता चला कि इस ब्लैकमनी की बैंकिंग चैनल के जरिए ‘लॉन्डरिंग’ की गई है। महाजन ने कहा कि एंट्री आपरेटर की पहचान हो गई है, लेकिन अभी भी मुख्‍य आरोपी का पता नहीं चल सका है।

18 से ज्यादा लोगों का फायदा हुआ...

- महाजन ने कहा कि एंट्री ऑपरेटर ने डिपॉजिट की सुविधा उपलब्ध कराकर 18 से ज्यादा लोगों को फायदा पहुंचाया।

- उन्होंने कहा कि इसके बेनिफिशियरीज की संख्या और भी ज्यादा हो सकती है।

- अधिकारी ने कहा कि ऐसे कई हवाला एंट्री ऑपरेटर्स के नाम सामने आए हैं, जो डिपॉजिट्स की सुविधा देकर फीस वसूलते थे। इसके अलावा अनअकाउंटेड कैश को जमा करने के लिए बड़ी संख्या बेनामी अकाउंट्स भी खोले गए।

- इसके साथ ही डिपार्टमेंट नोटबंदी के बाद पंजाब, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और हरियाणा के कुछ हिस्सों सहित पूरे एनडब्ल्यूआर रीजन में 280 करोड़ रुपए की ब्लैकमनी का पता लगा चुका है।

टैक्स चोरों ने इस्तेमाल किए कई तरीके...

- अधिकारियों ने कहा कि टैक्स चोरों ने कथित तौर पर कई तरीकों का इस्तेमाल किया।

- डिपार्टमेंट ने पाया कि एक कंपनी के मामले में कर्मचारियों के खाते में 10 हजार से 40 हजार रुपए तक जमा किए गए, जिसे सिर्फ एचआर और कंपनी के अकाउंट डिपार्टमेंट के लोग ही निकाल सकते हैं।

- उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में बैंक अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है और डिपार्टमेंट ने इस मामले को सीबीआई और एन्फोर्समेंट डायरेक्टर को भेज दिया है।

- अधिकारियों ने बताया कि इसी तरह कुछ ज्वैलर्स ने कथित तौर पर कैश में भारी बिक्री दिखाई, वहीं कुछ बिल्डर्स ने बैक डेट में कैश डिपॉजिट दिखाया।

- आईटी डिपार्टमेंट ने यह भी पाया कि नवंबर में नोटबंदी के लागू होने के बाद पंजाब में कुछ कोऑपरेटिव बैंकों ने निर्धारित स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिजर्स का पालन नहीं किया। ऐसे ही कुछ मामलों में 2.50 करोड़ रुपए कैश भी सीज किया।