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2019 में यूपी जीत के लिए बीजेपी ने बनाया ये प्लान

देश की राजनीति में कहा जाता है कि जो भी यूपी जीतता है, वह ही केंद्र की गद्दी पर काबिज होता है। इसके लिए खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 में गुजरात के साथ-साथ यूपी के बनारस से चुनाव लड़ा

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न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (28 दिसंबर): देश की राजनीति में कहा जाता है कि जो भी यूपी जीतता है, वह ही केंद्र की गद्दी पर काबिज होता है। इसके लिए खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 में गुजरात के साथ-साथ यूपी के बनारस से चुनाव लड़ा था, जिसके बाद बीजेपी गठबंधन को यूपी में 80 में से 73 सीटों पर जीत मिली थी। हालांकि इस बार माहौल थोड़ा अलग है और सपा-बसपा गठबंधन होने से बीजेपी को प्रदेश में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। वैसे बीजेपी भी यूपी में अपने दबदबे को कायम रखने के लिए जीतोड़ मेहनत में लगी हुई है।

दरअसल, बीजेपी और संघ परिवार पिछले तीन महीनों से एक अहम योजना पर मेहनत कर रहे हैं। योजना में प्रत्येक 80 सीटों पर नेताओं और काडर की तैनाती व लोगों के बीच किन-किन मुद्दों की ज्यादा चर्चा है, इसके लिए ग्राउंड जीरो से फीडबैक इकट्ठा किया जा रहा है। गुजरात के पूर्व गृह मंत्री गोरधन झड़फिया की नियुक्ति इसी रणनीति का एक हिस्सा है। यूपी की जिन 71 सीटों पर बीजेपी ने पिछली बार जीत हासिल की थी, उन सभी सीटों पर आरएसएस प्रभारियों की नियुक्ति हो चुकी है। प्रभारी संबंधित सांसद के प्रदर्शन और इस बार उनके जीतने की संभावना को लेकर फीडबैक इकट्ठा कर रहे हैं। इसी फीडबैक के आधार पर बहुत हद तक तय होगा कि इन सीटों पर किसे टिकट मिलेगा। आरएसएस के संयुक्त महासचिव कृषण गोपाल यूपी की सियासी गतिविधियों की निगरानी कर रहे हैं और उनके शब्द ही आने वाले चुनाव में तमाम नेताओं की किस्मत तय करेंगे। आरएसएस बीजेपी को सुझाव दे रही है कि किन मुद्दों पर उसे बढ़त हासिल है और किन मुद्दों पर पार्टी पिछड़ती दिख रही है।

मोदी भले ही यूपी में अभी भी लोकप्रिय हैं, लेकिन वह कोई चांस नहीं लेना चाहते। इसका अंदाजा उनके निर्वाचन क्षेत्र वाराणसी में तैनात बीजेपी नेताओं की तादाद से लग सकता है। गुजरात के नवसारी से बीजेपी सांसद सीआर पाटिल अपने ज्यादातर वीकेंड्स वाराणसी में प्रॉजेक्ट्स की प्रगति की देखरेख के लिए गुजार रहे हैं। इसके अलावा गाजीपुर से सांसद और केंद्रीय मंत्री मनोज सिन्हा, यूपी बीजेपी अध्यक्ष और चंदौली से सांसद महेंद्र नाथ पाण्डेय भी वाराणसी में सक्रिय हैं। झड़फिया खुद 2014 के चुनावों में वाराणसी में काम कर चुके हैं और बाद में उन्होंने सूबे में किसानों और पिछड़ी जातियों के बीच काम किया था। यूपी के लिए नए चुनाव-सह प्रभारी दुष्यंत गौतम और नरोत्तम मिश्रा भी अपनी-अपनी योजनाओं के साथ सूबे में सक्रिय हैं। गौतम जहां दलित वोटरों को लुभाएंगे, वहीं मिश्रा का इस्तेमाल बुंदेलखंड क्षेत्र में होगा जहां सवर्णों की अच्छी-खासी तादाद है।

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