हरीश रावत की अपील, 'फैसला सुनाने से पहले मेरा पक्ष भी सुने सुप्रीम कोर्ट'

 

नई दिल्ली(२२ अप्रैल) उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सुप्रीम कोर्ट में एक विरोध-पत्र दायर कर केंद्र की अपील पर किसी फैसले से पहले खुद का पक्ष सुने जाने की अपील की है। उत्तराखंड से राष्ट्रपति शासन हटाए जाने के हाई कोर्ट के फैसले को केंद्र सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगा। सीनियर कांग्रेस नेताओं ने गुरुवार को अपनी कानूनी टीमों के साथ बैठक की और सुप्रीम कोर्ट में विरोध-पत्र दायर करने का फैसला किया।

उत्तराखंड पर नैनीताल हाईकोर्ट के फैसले के बाद केंद्र और हरीश रावत दोनों अपनी अपनी रणनीति बनाने में लगे हैं। शुक्रवार सुबह हरीश रावत ने अपनी कैबिनेट के साथ एक बैठक की तो दूसरी ओर केंद्र इस मामले पर हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करने जा रही है।

उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लागू करने की घोषणा को रद्द करने और हरीश रावत की अगुवाई वाली कांग्रेस सरकार को बहाल करने के उत्तराखंड हाई कोर्ट के आदेश से असहज हुई बीजेपी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने का फैसला किया। बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और वरिष्ठ मंत्रियों ने जल्दबाजी में बैठक कर ये फैसला लिया। बैठक में शामिल रहे अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने बताया कि वह शुक्रवार सुबह प्रधान न्यायाधीश टी एस ठाकुर की पीठ के समक्ष मामले को रखेंगे और हाई कोर्ट के फैसले पर स्थगन की मांग करेंगे।

शाह के आवास पर हुई बैठक में रोहतगी के अलावा गृह मंत्री राजनाथ सिंह, वित्त मंत्री अरुण जेटली जो स्वयं भी कानून के जानकार हैं, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्रा, गृह सचिव राजीव महर्षि शामिल हुए और उच्च न्यायालय के आदेश के प्रभावों और पार्टी और सरकार के समक्ष मौजूद विकल्पों पर विचार-विमर्श किया।