मोदी के सहारे गुजरात में चुनाव लड़ेगी बीजेपी

नई दिल्ली(4 जुलाई): इस साल के अंत में गुजरात में विधानसभा चुनाव होना है। ऐसे में बीजेपी एक बार फिर सत्ता पर काबिज होने के लिए तैयारियां तेज कर दी हैं। चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ब्रैंड बीजेपी का मंत्र होगा।


- पार्टी के सीनियर नेताओं के मुताबिक, इस ब्रैंड पर जाति और वर्ग की बंदिशें लागू नहीं होतीं। इस मंत्र को बढ़ावा देने के लिए पार्टी अध्यक्ष अमित शाह राज्य में कई दौर की बैठकें कर चुके हैं, ताकि चुनाव प्रचार में संगठन को झोंका जा सके। वह 9 जुलाई से अहमदाबाद में और 3 दिन गुजार सकते हैं।


- इस दौरान वह सबसे अच्छे उम्मीदवारों के बारे में फैसला करेंगे और जमीनी स्तर पर व्यापक पहुंच के लिए रणनीति को अंतिम रूप देंगे। पार्टी की पिछली प्रमुख बैठक में शाह ने मध्य गुजरात के 8 जिलों के कार्यकर्ताओं से हर वोटर तक पार्टी का संदेश पहुंचाकर उन्हें पार्टी के लिए वोट देने की खातिर तैयार करने के लिए कहा था। शाह ने कार्यकर्ताओं को याद दिलाते हुए कहा था कि मोदी को राज्य की 150 सीटों का गिफ्ट देना उनकी जिम्मेदारी बनती है।


- पार्टी के एक सीनियर नेता ने बताया, 'चुनाव पूरी तरह से नरेंद्र मोदी की ब्रैंड वैल्यू पर लड़ा जाएगा। राज्य और देश के लिए उनका काम और जिस 

तरह से उन्होंने गुजरात और भारत की इमेज को विदेश में ऊपर उठाया है, वह इस बार वोट मांगने के मामले में बड़ा फैक्टर होगा।'


- बता दें पिछले 15 साल में गुजरात में पहली बार होगा, जब नरेंद्र मोदी के सीएम नहीं रहते हुए राज्य में चुनाव होंगे। हालांकि, कांग्रेस नेता शक्तिसिंह गोहिल ने बताया कि जिला परिषद चुनावों में कांग्रेस पार्टी का 31 में से 23 सीटें जीतना इस बात का संकेत है कि लोग उनकी पार्टी को गंभीरता से ले रहे हैं।


- गोहिल ने कहा, 'घर, नौकरियों आदि को लेकर बीजेपी सरकार की तरफ से किए गए वादे अब तक पूरे नहीं हुए हैं। सरकार के हर तबके में आउटसोर्सिंग का मामला है, जिसे कारण सरकारी एंप्लॉयीज में काफी असंतोष है। राज्य के लोग रूपानी और वाघानी के लिए वोट नहीं करेंगे। उन्होंने मोदी के लिए वोट दिया। वे पहले ही दिखा चुके हैं कि वे हम पर भरोसा करने को तैयार हैं और पहले भी गुजरात के लोग केंद्र में यूपीए के लिए और राज्य में बीजेपी के लिए वोट कर चुके हैं, लिहाजा इस बार इसका ठीक उलटा हो सकता है। बीजेपी हमेशा से 'हर मुमकिन तरीके' से कांग्रेस विधायकों को तोड़ने की कोशिश करती रही है।' हालांकि, बीजेपी का मानना है कि जिला परिषद के चुनावों के बाद से पार्टी के हालात में सुधार हुआ है। खासतौर पर यूपी जैसे राज्यों में लगातार जीत के बाद।