पीएसी अध्यक्ष थॉमस के खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाने की मांग

नई दिल्ली ( 27 जनवरी ): लोक लेखा समिति के अध्यक्ष केवी थाॅमस के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव लाने की मांग की गई है। पहली बार ऐसा हुआ कि लोक लेखा समिति (पीएसी) के किसी सदस्य ने समिति के अध्यक्ष केवी थॉमस के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव लाने की मांग की है। सदस्य का आरोप है कि थॉमस ने प्रधानमंत्री की ‘गरिमा कम करने के लिए’ समिति का इस्तेमाल किया।

थॉमस ने नौ जनवरी को कोच्चि में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा था कि पीएसी को नोटबंदी के मुद्दे पर प्रधानमंत्री को भी तलब करने का अधिकार है। समिति केंद्र के नोटबंदी के फैसले की समीक्षा कर रही है। कांग्रेस नेता थॉमस ने अपनी यह टिप्पणी दोहराई भी थी। हालांकि, पीएसी ने बाद में बयान जारी कर कहा था कि प्रधानमंत्री को समिति के सामने तलब नहीं किया जाएगा।

पीएसी सदस्य और भाजपा नेता निशिकांत दुबे ने लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन को एक पत्र लिखकर कहा है, ‘के वी थॉमस बेचैन हो गए और इस क्रांतिकारी कदम (नोटबंदी) के राजनीतिकरण के विकल्प तलाशने लगे, उन्होंने प्रधानमंत्री की गरिमा कम करने के अपने राजनीतिक उद्देश्यों को पूरा करने के लिए पीएसी के मंच का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया।’ दुबे ने कहा, ‘लिहाजा, मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि लोकसभा में मुझे विशेषाधिकार का प्रश्न उठाने की अनुमति दें और इसी अनुरूप मेरे इस पत्र को लोकसभा में प्रक्रिया एवं कार्य संचालन नियमों के नियम 223 के तहत नोटिस के तौर पर लें।’

भाजपा सांसद ने कहा कि लोकसभा में प्रक्रिया एवं कार्य संचालन नियमों के तहत परीक्षण एवं जांच के लिए मामले को विशेषाधिकार समिति के पास भी भेजा जा सकता है। एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए दुबे ने थॉमस पर आरोप लगाया उन्होंने 20 जनवरी को हुई बैठक के संदर्भ उद्धृत किए और कहा कि यह ‘समिति के विशेषाधिकार का उल्लंघन है।’