बीजेपी विधायक का विवादित बयान- गोहत्या करने वालों के हाथ-पांव तुड़वा दूंगा

नई दिल्ली(26 मार्च): खतौली से बीजेपी विधायक विक्रम सैनी ने विवादित बयान दिया है। शनिवार को अभिनंदन समारोह में उन्होंने कहा कि 'जो गो-माता को माता न मानते हों और उनकी हत्या करते हों, तो मैंने वादा किया था कि ऐसे लोगों के हाथ पैर तुड़वा दूंगा।'


- दरअसल मुजफ्फरनगर में पार्टी की मिली जीत पर बीजेपी संगठन की ओर से अभिनंदन समारोह आयोजित किया गया था।


- इस समारोह में केंद्रीय जल संसाधन राज्यमंत्री डॉ संजीव बालियान, प्रदेश के गन्ना विकास एवं चीनी मिल राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) सुरेश राणा समेत जिले के पांच विधायकों का अभिनंदन किया गया। लेकिन इसी मंच पर खतौली से बीजेपी विधायक विक्रम सैनी ने जब भाषण देना शुरू किया तो वहां उपस्थित लोग भी भौंचक हो गए। विधायक जी के बिगड़े बोल रुकने के नाम नहीं ले रहे थे, मंच से बार-बार उन्होंने रोकने की कोशिश की गई।


- नवनिर्वाचित विधायक सैनी यहीं नहीं रुके उन्होंने आगे कहा कि 'जो व्यक्ति वंदे मातरम बोलने में संकोच करता हो, या भारत माता के नारे लगाते हुए जिसका सीना चौड़ा न होता हो और जो गोमाता को माता न मानते हो और उनकी हत्या करते हों, तो मैंने वादा किया था कि ऐसे लोगों के हाथ पैर तुड़वा दूंगा।'


- यही नहीं, उन्होंने कार्यकर्ताओं को संबोध‍ित करते हुए कहा, मेरे साथ युवाओं की टीम है। ये टीम अगर पाकिस्तान-चीन से युद्ध हो जाए तो बिना वेतन लिए सीमा पर जा सकते हैं और मैं भी साथ रहूंगा। उन्होंने कहा कि कानून वगैरह तो तुम जानते होंगे, क्योंक‍ि मैं पढ़ा-लिखा तो हूं नहीं।


- इस दौरान मंच पर मौजूद बीजेपी के मंत्री और नेताओं ने विधायक को रोकने का खूब प्रयास किया, इसके बावजूद वो बोलते चले गए। बाद में उनका भाषण समाप्त करा दिया गया। बता दें कि विक्रम सैनी मुजफ्फरनगर के कवाल गांव के रहने वाले हैं , जहां से दंगे की चिंगारी फैली थी। उन्होंने कहा की मेरे साथ युवाओं की टीम है। यह टीम ऐसी है कि अगर पाकिस्तान या चीन से युद्ध हो जाए तो बिना वेतन लिए सीमा पर जा सकते हैं।


-हालांकि मंच पर मौजूद बीजेपी नेताओं ने विधायक सैनी को रोकने का खूब प्रयास किया, लेकिन फिर भी वह बोलते चले गए। हालांकि बाद में उनका भाषण समाप्त करा दिया गया।


-गौरतलब है कि यह बीजेपी विधायक उसी गांव कवाल के रहने वाले हैं जहां तीन हत्याओं के बाद दंगे की शुरुआत हुई थी। उस वक्त विक्रम सैनी कवाल गांव के प्रधान थे और इन पर भड़काऊ भाषण और दंगों का आरोप भी लगा था। जिसके बाद जिला प्रशासन ने रासुका की कार्रवाई करते हुए सैनी को जेल भेज दिया था।