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साधना सिंह ने मांगी माफी, कहा- मेरी मंशा मायावती को बीजेपी नेता की मदद याद दिलाना था

बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती पर अमर्यादित टिप्पणी करने के बाद बीजेपी की महिला विधायक साधना सिंह ने माफी मांगी है। साधना सिंह की ओर से जारी किए गए माफीनामे में उन्होंने लिखा कि मेरा मकसद किसी को अपमान करने का नहीं था। मैं बस 2 जून, 1995 को गेस्ट हाउस कांड के दौरान मायावती की बीजेपी नेताओं द्वारा की गई मदद को याद दिलाना चाहती थी।

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (20 जनवरी):  बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती पर अमर्यादित टिप्पणी करने के बाद बीजेपी की महिला विधायक साधना सिंह ने माफी मांगी है। साधना सिंह की ओर से जारी किए गए माफीनामे में उन्होंने लिखा कि मेरा मकसद किसी को अपमान करने का नहीं था। मैं बस 2 जून, 1995 को गेस्ट हाउस कांड के दौरान मायावती की बीजेपी नेताओं द्वारा की गई मदद को याद दिलाना चाहती थी।

चंदौली के मुगलसराय से बीजेपी विधायक साधना सिंह ने कहा कि मेरी मंशा एक दम किसी को अपमानित नहीं करने की थी। अगर किसी को मेरी बातों से कष्ट पहुंचा है तो मैं खेद प्रकट करती हूं। इससे पहले साधना सिंह के बयान को स्वत: संज्ञान लेते हुए राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने उन्हें नोटिस भेजने का फैसला किया था।

बता दें कि चंदौली जनपद के बबुरी थाना के परनपुरा गांव में किसान कुंभ अभियान कार्यक्रम में बीजेपी विधायक साधना सिंह ने मायावती पर अमर्यादित टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि जब द्रोपदी का चीर हरण हुआ तो उसके बाद महाभारत हुआ, लेकिन सपा ने मायावती का चीर हरण किया, उसके बावजूद भी सत्ता के लोभ में आकर उन्होंने सपा से गठबंधन करके महिलाओं की अस्मत पर दाग लगाया है। इसके बाद साधना सिंह ने कई अमर्यादित बयान देते हुए उनकी (मायावती की) तुलना किन्नर से कर दी थी।

साधना सिंह के इस विवादित बयान पर बसपा के महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा ने कहा कि,  बीजेपी विधायक ने हमारे पार्टी प्रमुख के लिए जिन शब्दों का इस्तेमाल किया, वह बीजेपी के स्तर को दर्शाता है। सपा-बसपा गठबंधन की घोषणा के बाद बीजेपी नेताओं ने अपना मानसिक संतुलन खो दिया है और उन्हें आगरा या बरेली के मानसिक अस्पतालों में भर्ती कराया जाना चाहिए। वहीँ, सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा था कि बीजेपी विधायक ने जिस तरह से आपत्तिजनक शब्द मायावती के लिए कहे हैं वह घोर निंदनीय है।  यह बीजेपी के नैतिक दिवालियापन हताशा का प्रतीक है। यह केवल मायावती का ही नहीं बल्कि देश की महिलाओं का भी अपमान है।  

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