जन्मदिन विशेष: 'ट्रेजडी क्वीन' मीना कुमारी की अनसुनी कहानियां

नई दिल्ली ( 1 अगस्त ): 'ट्रेजडी क्वीन' मीना कुमारी का आज जन्म दिन है। मीना कुमारी का जन्म 1 अगस्त, 1932 को मुंबई में हुआ था, उनका असली नाम महजबीं बानो था। उनके पिता अली बख्स पारसी रंगमंच के कलाकार थे और उनकी मां थिएटर की मशहूर अदाकारा और नृत्यांगना थीं, जिनका ताल्लुक रवींद्रनाथ टैगोर के परिवार से था।

'ट्रेजडी क्वीन' नाम से मशहूर मीना कुमार ऐसी अभिनेत्री थीं, जिनके सामने 'ट्रेजडी किंग' दिलीप कुमार तक नि:शब्द हो जाते थे और अभिनेता राजकुमार तो सेट पर अपने डायलॉग ही भूल जाते थे। उनके साथ हर कलाकार काम करने को बेताब रहा करता था, उनकी खूबसूरती ने सभी को अपना कायल बना लिया था।

मीना कुमारी ने तीन दशकों तक बॉलीवुड में अपनी दमदार अदाकारी से राज किया। 1 अगस्त को मीना कुमारी का जन्मदिन है, उनके जन्मदिन पर हम आपको बताते हैं मीना कुमारी की जिंदगी का सफरनामा।

पैदा होते ही मीना को उनके अब्बा अली बख्श ने रुपये की तंगी और पहले से दो बेटियों के बोझ से घबराकर एक मुस्लिम अनाथ आश्रम में छोड़ दिया था। उनकी मां के काफी रोने-धोने पर वो उन्हें वापस ले आए।

मीना कुमारी ने महज चार साल की उम्र से ही फिल्मों में काम करना शुरू कर दिया था। उन्होंने बाल-कलाकर के रूप में 20 फिल्मों में काम किया। महजबीं बानो का नाम मीना कुमारी विजय भट्ट की लोकप्रिय फिल्म बैजू बावरा के बाद पड़ा। इसके बाद वह इसी नाम से मशहूर हो गईं।

मीना कुमारी ने अपने अकेलेपन और जज्बातों को कलमबंद किया। उनकी शायरी दिलों को कुरेद देने वाली हैं। ज्यादातर फिल्मों में ट्रेजडी वाली भूमिकाएं निभाने की वजह से उन्हें बॉलीवुड की ट्रेजडी क्वीन कहा जाने लगा। उनके जीवन की कड़वाहट और तनहाइयां उनकी फिल्मों में भी नजर आईं।

मीना कुमारी के साथ काम करने वाले लगभग सभी कलाकार मीना की खूबसूरती के कायल थे, लेकिन मीना कुमारी तो मशहूर फिल्मकार कमाल अमरोही में प्यार में थीं। उन्होंने कमाल से निकाह भी किया। यहां भी उन्हें कमाल की दूसरी पत्नी का दर्जा मिला, लेकिन इसके बावजूद कमाल के साथ उन्होंने अपनी जिंदगी के खूबसूरत 10 साल बिताए।

10 साल के बाद धीरे-धीरे मीना कुमारी और कमाल के बीच दूरियां बढ़ने लगीं और फिर 1964 में मीना कुमारी कमाल से अलग हो गईं। इस अलगाव की वजह अभिनेता धर्मेद्र थे, जिन्होंने उसी समय अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की थी। उस समय मीना कुमारी के सितारे बुलंदियों पर थे, उनकी एक के बाद एक फिल्म हिट हो रही थी। मीना कुमारी बॉलीवुड के आसमां का वो सितारा थीं, जिसे छूने के लिए हर कोई बेताब था।

अपनी शोहरत के बल पर मीना कुमारी ने धर्मेद्र के करियर को ऊंचाइयों तक ले जाने की पूरी कोशिश की, लेकिन इतना सब करने के बाद भी मीना को धर्मेद्र से भी बेवफाई ही मिली। फिल्म फूल और कांटे की सफलता के बाद, धर्मेद्र ने मीना कुमारी से दूरियां बनानी शुरू कर दीं और एक बार फिर से मीना कुमारी अपनी जिंदगी में तन्हा रह गईं। धीरे-धीरे शराब की लत की गिरफ्त में आ गईं और बीमार हो गईं।

फिल्म पाकीजा के रिलीज होने के तीन हफ्ते बाद, मीना कुमारी गंभीर रूप से बीमार हो गईं। 28 मार्च, 1972 को उन्हें सेंट एलिजाबेथ के नर्सिग होम में भर्ती कराया गया। मीना ने 29 मार्च, 1972 को आखिरी बार कमाल अमरोही का नाम लिया, इसके बाद वह कोमा में चली गईं. मीना कुमारी महज 39 साल की उम्र में इस दुनिया को अलविदा कह गईं।