जन्मदिन विशेषः भावुक कर देने वाले मोदी के जीवन के अनसुने सच

नई दिल्ली (17 सितंबर): पीएम नरेंद्र मोदी आज 66 वर्ष के हो गए हैं। इस उपलक्ष्य में दो साल बाद अपने जन्मदिन पर अपने गृह निवास मां की आर्शिवाद लेने पहुंचे। हम इस खुशी के मौके पर आपके लिए लाए हैं मोदी के जीवन से जुड़े कुछ अनसुने सत्य जो आपको कर देंगे हैरान। पेश हैं हैरान कर देनें वाले सत्य। 

1- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बचपन में नरिया कहकर बुलाया जाता था। नरेंद्र मोदी के पिता की रेलवे स्टेशन पर चाय की दुकान चलाते थे। 

2- वर्ष 1965 में जब भारत और पाकिस्तान का युद्ध हुआ तो नरेंद्र मोदी करीब 15 साल के थे। उन दिनों वो सुबह ही अपनी टोली के साथ रेलवे स्टेशन पहुंच जाते और वहां से होकर गुजरने वाले सैनिकों की सेवा में जुट जाते थे। इसी तरह 1967 में जब गुजरात में भयंकर बाढ़ आई तो नरेंद्र मोदी अपने साथियों के साथ बाढ़ पीड़ितों की मदद में जुट गए थे।

3- नरेन्द्र मोदी को बचपन में एक्टिंग का शौक था। मोदी बचपन में स्कूल में एक्टिंग, वाद-विवाद, नाटकों में भाग लेते और पुरस्कार जीतते थे। एनसीसी में भी शामिल हुए।

4- नरेन्द्र मोदी बचपन में साधु-संतों से प्रभावित हुए। वे बचपन से ही संन्यासी बनना चाहते थे। संन्यासी बनने के लिए मोदी स्कूल की पढ़ाई के बाद घर से भाग गए थे। इस दौरान मोदी पश्चिम बंगाल के रामकृष्ण आश्रम सहित कई जगहों पर घूमते रहे। हिमालय में कई महीनों तक साधुओं के साथ रहे। दो साल बाद जब वह हिमालय से वापस लौटे तब उन्होंने संन्यासी जीवन त्यागने का फैसला लिया। 

5- आरएसएस से जुड़ने के बाद नरेंद्र मोदी ने नमक और तेल खाना बंद कर दिया था। इससे उनकी मां और भाई प्रह्लाद मोदी डर गए कि कहीं नरेंद्र मोदी फिर से साधु बनने तो नहीं जा रहे हैं। नरेंद्र मोदी बचपन से ही आरएसएस से जुड़े हुए थे। 

6- 1958 में दीपावली के दिन गुजरात आरएसएस के पहले प्रांत प्रचारक लक्ष्मण राव इनामदार उर्फ वकील साहब ने नरेन्द्र मोदी को बाल स्वयंसेवक की शपथ दिलवाई थी। 

7- नरेंद्र मोदी की जीवनी लिखने वाले लेखक एमवी कामथ के मुताबिक गुजरात आरएसएस के दफ्तर हेडगेवार भवन में सुबह नरेंद्र मोदी प्रचारकों के लिए चाय नाश्ता बनाते थे। 

8- इसके बाद हेडगेवार भवन के सारे कमरों की सफाई में जुट जाते थे। आठ नौ कमरों की सफाई के बाद अपने और वकील साहब के कपड़े धोने की बारी आती थी। 

9- मोदी ने आरएसएस के बड़े शिविरों के आयोजन में मैनेजमेंट का हुनर खूब दिखाया। आरएसएस नेताओं का ट्रेन और बस में रिजर्वेशन का जिम्मा उन्हीं के पास होता था।  

10- जब मोदी ने चाय की दुकान खोली तो शाखाओं में उनका आना जाना कम हो गया। नरेंद्र मोदी का मैनेजमेंट और उनके काम करने के तरीके को देखने के बाद आरएसएस में उन्हें बड़ी जिम्मेदारी देने का फैसला लिया गया। 

11- इसके लिए उन्हें राष्ट्रीय कार्यालय नागपुर में एक महीने के विशेष ट्रेनिंग कैंप में बुलाया गया। आरएसएस के नागपुर मुख्यालय में ट्रेनिंग लेकर नरेंद्र मोदी गुजरात आरएसएस प्रचारक बनकर लौटे।

12- जब नरेन्द्र मोदी प्रचारक थे तो उन्हें स्कूटर चलाना नहीं आता था। शकरसिंह वाघेला उन्हें अपनी स्कूटर पर घुमाया करते थे। 

13- इमरजेंसी के दौरान नरेंद्र मोदी ने शंकर सिंह बाघेला के साथ मिलकर गुजरात बीजेपी के कार्यकर्ताओं में नया जोश भरने का काम किया किया और मजबूत कार्यकर्ताओं की फौज तैयार की।

14- नरेन्द्र मोदी संघ में कुर्ते की बांह छोटी करवा लीं, ताकि वह ज्यादा खराब न हो, जो वर्तमान में मोदी ब्रांड का कुर्ता बन गया है और दुनिया भर में मशहूर है।