हाथ में पकड़ने भर से चार्ज हो जाता है मोबाइल

नई दिल्ली (18 मई): एक दुर्घटना ने इंग्लैण्ड के रहने वाले जेम्स यांग की जिंदगी बदल दी। अक्सर दुर्घटनाओँ के बाद डिसएबेलिटी लोगों के मन में हीन भावना भर देती है, मगर दुर्घटना के बाद जेम्स खुद को एक सेलेब्स की तरह महसूस कर रहे हैं। दरअसल, एक दुर्घटना में जेम्स के एक हाथ और पैर नहीं रहा। उसकी जगह कृत्रिम हाथ और पैर लगाना पड़ा। कृत्रिम हाथ नयी तकनीक से तैयार किया गया है। अब जेम्स को अपना मोबाइल चार्ज करने के लिए अलग से किसी चार्जर की जरूरत नहीं पड़ती। उनका एक हाथ ही यह काम कर देता है।

अंधेरे में कुछ देखने की जरूरत पड़ती तो पर यह हाथ रोशनी भी कर देता है। जेम्स के कृत्रिम हाथ में मोबाइल चार्जर, टार्च और ड्रोन फिट हैं। इसी कारण उनके लिए यह एक सामान्य हाथ के रूप में मददगार होने के साथ साथ अन्य कई विशेष सुविधाएं भी मुहैया कराता है। जेम्स के इस कृत्रिम हाथ को बायोनिक हैंड भी कहा जाता है। इसी हाथ की वज़ह से लोग उन्हें पार्शियल साइबोर्ग भी कहने लगे हैं। जेम्स की यह बायोनिक आर्म मैटल और प्लास्टिक से मिलाकप बनाई गई है। यह उसके कंधों की मसल्स से तालमेल बनाकर कार्य करती है।उनके कंधों की स्किन पर लगे खास सेंसर मसल्स के संकेतों को पकड़ते हैं और फिर हाथ को संचालित करते हैं। ये बायोनिक आर्म सोलर बैटरी से चलती है। जेम्स की इस बायोनिक आर्म को देखने के लिए लोगों की भीड़ लगी रहती है।