ये है इंडिया: बिहार से भी बड़ा यूपी का 'टॉपर घोटाला'

नई दिल्ली(27 जून): मतलब बात कुछ यूं हो गई है कि टॉपर का नाम लेते है सबसे पहले ख्याल आता है कि असली या फर्जी। टॉपरों के साथ स्वाभाविक रुप से जुड़ने वाला शब्द था सम्मान। अब हो गया है घोटाला। इसका विस्तार इतना हो चुका है कि अब हर शाख पर मिलने लगे हैं टॉपर । हालात इतने बुरे हैं कि क्या बताएं। 

बिहार के बाद अब यूपी के टॉपरों की जानकारी ने दंग कर दिया है। पॉलिटेक्निक की परीक्षा के टॉपर ये तक नहीं बता पाए कि हिंदी के आठ को अंग्रेजी में कैसे लिखते हैं। सत्तर को अंग्रेजी में क्या कहते हैं। और तो और हिंदी में उस कॉलेज का नाम तक नहीं लिख पाए जहां के कमरे में परीक्षा देकर वो सीधे पॉलिटेक्निकल दाखिले के टॉपर बन बैठे थे।    चार दिन पहले आपको बताया था कि यूपी के गाजीपुर के बुद्धम शरणं कॉलेज में पॉलिटेक्निल कॉलेजों में दाखिले की परीक्षा हुई थी। और उसके एक कमरे में ज्ञान की ऐसी बत्ती जली थी कि पूरा का पूरा कमरा टॉपरों से भर गया। हमारी खबर का असर ये हुआ कि टॉपरों वाले इस कमरे के सारे छात्रों को लखनऊ तलब किया गया। बिहार की तर्ज पर ही टॉपरों का टेस्ट हुआ। और बिहार से भी बड़ा यूपी का टॉपर घोटाला सामने आ गया।

पॉलिटेक्निक परीक्षा आयोजित करवाने वाली संयुक्त प्रवेश परीक्षा परिषद की टेस्ट लेने वाली टीम टॉपरों से बिल्कुल बच्चों वाले सवाल पूछ रही थी। और टॉपर धराशायी हो रहे थे। एक टॉपर से पूछा गया कि चलिए बताइए आपका रोल नंबर है आठ। इसे अंग्रेजी में कैसे लिखेंगे। टॉपर ने अंग्रेजी के ऐट की स्पेलिंग लिखी ATE

दूसरे टॉपर से पूछा गया कि आपको मार्क्स मिले हैं 70। बताइए इसे अंग्रेजी में कैसे लिखेंगे। टॉपर सेवनटी की स्पेलिंग तक नहीं लिख पाया। तीसरे टॉपर से सवाल था आपने बुद्धम शरणं कॉलेज से परीक्षा दी है। हिंदी में बुद्धम शरणं लिख कर दिखाइए। टॉपर के पसीने छूट गए लेकिन वो बुद्धम शऱणं नहीं लिख पाया।

इसके बाद कहने को कुछ नहीं रह गया। टॉपरों के ज्ञान ने हर किसी को हैरान कर दिया। जिस परीक्षा में टॉप करके टॉपर सीधे यूपी के सबसे अच्छे और बड़े पॉलिटेक्निक कॉलेजों में दाखिला पा जाते। उन्हें अक्षरों का मामूली ज्ञान तक नहीं था। अब गाजीपुर के बुद्धम शरणं कॉलेज पर गाज गिराने की तैयारी है। कॉलेज के परीक्षा प्रभारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो गई है। 23 नंबर कमरे वाले 25 टॉपरों की परीक्षा रद्द कर दी गई है। बाकी की जांच अभी जारी है।

बताइए कि 25 टॉपरों की ऑनसर शीट की जांच हुई तो पता चला कि सारे के सारे ऑनसरशीट में सिर्फ 5 से 7 लोगों की हैंडराइटिंग है। शक तो यहां तक ही कि इन टॉपर महोदयों ने परीक्षा देने की भी जहमत नहीं उठाई होगी। सीधे मेरिट लिस्ट में नाम आते ही अपने कागजात लेकर दाखिले के लिए कॉलेज तक पहुंच जाते। अगर इस खेल का खुलासा न होता।