बिहार: सीएम के शहर तक पहुंची शौचालय घोटाले की जांच, शुरू हुई सियासत

सौरभ कुमार/अमिताभ ओझा, पटना ( 10 नवंबर ): बिहार में सृजन घोटाले की जांच अभी चल ही रही कि सरकार के नाक के नीचे पटना में शौचालय घोटाला हो गया। हालांकि घोटाले की राशि सृजन की तरह बहुत बड़ी नहीं है, लेकिन सरकारी राशि की बंदरबांट की अनोखी कहानी है। अब तक की जांच में यह साढ़े तेरह करोड़ का घोटाला सामने आया है। हालांकि अभी भी इसकी जांच चल ही रही है। 

इस घोटाले की सबसे बड़ी बात यह है कि इस घोटाले जांच बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के शहर तक पहुंच गई है। साथ ही जांच के दायरे में वो लोग हैं जो कभी खुद को मुख्यमंत्री नीतीश का करीबी बताते थे। हालांकि मामले की जांच एसआईटी ने शुरू कर दी है और अब तक इस मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

पटना में शौचालय घोटाला की भनक पटना के जिलाधिकारी डॉ संजय अग्रवाल को समीक्षा बैठक के दौरान लगी थी। केंद्र सरकार की स्वच्छ भारत मिशन और राज्य सरकार की योजना लोहिया स्वच्छता योजना के तहत दी जाने वाली राशि का बड़े पैमाने पर बंदरबांट हुआ था। नियम के विरुद्ध सरकारी अधिकारियो और बैंककर्मियों की मिलीभगत से लाभुको को दी जाने वाली राशि करोडो में स्वयंसेवी संस्थाओ को दे दिया गया था। जिलाधिकारी ने पुरे मामले में अब तक साढ़े तेरह करोड़ की गड़बड़ी पाई थी।

अब इस मामले की जांच सीएम के शहर बख्तियारपुर पहुंच जाने के बाद सियासत भी गर्म हो गई है। इस मामले में मां सर्वेश्वरी सेवा संस्थान जो बख्तियारपुर में है उसके बारे में कई जानकारियां मिली हैं। बख्तियारपुर में गंगा नदी के तट पर श्री सर्वेश्वरी समूह संसथान नाम का आश्रम चलता है। इस आश्रम की देश में कई शाखाएं हैं। उनमें से एक बख्तियारपुर में भी है। 

संस्था के लोगों ने बताया की इस संस्था के सदस्यों में सीएम नीतीश कुमार के भाई सतीश कुमार भी हैं। लेकिन इन सदस्यों ने साफ किया कि जिन लोगों ने घोटाला किया है उनका इस संस्थान से कोई नाता नहीं है। हालांकि संस्थान ने बताया की घोटाले की आरोपी प्रमिला देवी और उनके पति अभिमन्यु सिंह सहित उनके परिवार के नौ सदस्य इस संस्था से जुड़े थे जिन्हें तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है।