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जेडीयू नेता प्रशांत किशोर ने की इस्तीफे की पेशकश, नीतीश कुमार का इन्कार

मोदी (Narendra Modi) सरकार द्वारा देश में नागरिता संशोधन बिल (Citizenship Amendent Bill) पारित होने के बाद एनडीए की सहयोगी जेडीयू (Jdu) के समर्थन देन बाद पार्टी के उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) नाराज हो गए है।

Prashant Kishor, प्रशांत किशोर

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न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (14 दिसंबर): मोदी (Narendra Modi) सरकार द्वारा देश में नागरिता संशोधन बिल (Citizenship Amendent Bill) पारित होने के बाद एनडीए की सहयोगी जेडीयू  (Jdu) के समर्थन देन बाद पार्टी के उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) नाराज हो गए है। बिल (Bill) को जेडीयू (Jdu) के समर्थन के बाद प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) ने पार्टी से इस्तीफा देने की पेश कर दी है। प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) ने शनिवार को पटना में राज्य के सीएम और पार्टी सुप्रीमो नीतीश कुमार से मिलकर इस्तीफा पेश किया। हालांकि, सूत्रों के अनुसार नीतीश कुमार ने उनके इस्तीफे को अस्वीकार कर दिया है।

बता दें कि नागरिकता संशोधन कानून पर पार्टी बुरी तरह दो भाग में बंट गई थी। जहां प्रशांत किशोर की अगुवाई में पवन वर्मा, गुलास रसूल बलियावी सहित कई नेताओं ने इस बिल का सपॉर्ट करने के पार्टी के फैसले को सार्वजनिक रूप से गलत कहा, तो पार्टी के दूसरे सीनियर नेताओं ने आरसीपी सिंह के नेतृत्व में न सिर्फ बिल को बिना शर्त समर्थन किया बल्कि प्रशांत किशोर जैसे नेताओं पर अपरोक्ष रूप से करारा हमला भी किया। दिलचस्प बात है कि जिस दिन प्रशांत किशोर ने नीतीश कुमार से मुलाकात की उसी दिन दिल्ली में आम आदमी पार्टी सुप्रीमो और दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने एलान किया कि वह आगामी विधानसभा चुनाव में उनके साथ काम करेंगे। प्रशांत किशोर अभी पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के लिए भी चुनावी रणनीति बनाने का काम कर रहे हैं। 

वहीं, सूत्रों के अनुसार प्रशांत किशोर और नीतीश कुमार की बातचीत में एनआरसी का मामला भी उठा। किशोर की ओर से मामला उठाने पर नीतीश कुमार ने उन्हें भरोसा दिलाया कि बिहार में यह लागू नहीं होगा। सूत्रों के अनुसार नीतीश कुमार अगले कुछ दिनों में सार्वजनिक तौर पर इसका ऐलान भी कर सकते हैं। नीतीश कुमार का अब तक स्टैंड यही रहा है और पार्टी पूर्व में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ विरोध भी करती रही है। दिलचस्प बात है कि नीतीश कुमार की पार्टी ऐसी चंद पार्टियों में थी जो नागरिकता संशोधन के खिलाफ असम जाकर वहां विरोध कर रहे दलों के समर्थन में उतरी थी। हालांकि नागरिकता संशोधन बिल का सपॉर्ट करने के बाद अब अगर नीतीश कुमार एनआरसी का विरोध करते हैं तो यह एक और नया सियासी मोड़ हो जाएगा।


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