बिहार टाॅपर एक बार से सवालों के घेरे में

नई दिल्ली (7 जून): बिहार बोर्ड 12वीं की परीक्षा के नतीजे बुधवार की शाम घोषित कर दिए गए। विज्ञान संकाय की बात करें तो इस बार की देशभर में NEET टॉपर रही कल्पना कुमारी ने बिहार बोर्ड के 12वीं के विज्ञान संकाय में भी 434 अंक के साथ टॉप किया।कल्पना कुमारी के बतौर टाॅपर घोषण के बाद एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया, जिसको लेकर बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने झूठ बोलकर अपनी इज्जत बचाने में बेहतरी समझी। आपको बता दें कि विवाद कल्पना कुमारी के ज्ञान को लेकर कतई नहीं उठा बल्कि बिहार की घटिया शिक्षा व्यवस्था और बिहार बोर्ड को लेकर हुआ है।

 देश के किसी स्कूल की बात करें तो आपने अक्सर देखा होगा कि आप 10वीं या 12वीं बोर्ड की परीक्षा में बैठते हैं, तो छात्रों के लिए न्यूनतम उपस्थिति 75 फीसदी तय की गई है।क्योंकि बिहार बोर्ड ने इस बार एक ऐसी छात्रा को विज्ञान संकाय का टॉपर बना दिया, जिसने कभी अपने स्कूल में क्लास का मुंह तक नहीं देखा। दरअसल, पिछले हफ्ते NEET परीक्षा में टॉप करने के तुरंत बाद कल्पना कुमारी ने कई जगहों पर यह इंटरव्यू में बताया कि वह पिछले 2 साल से लगातार दिल्ली में आकाश इंस्टिट्यूट से मेडिकल की तैयारी कर रही थीं। इसी दौरान बिहार बोर्ड से 12वीं की परीक्षा देने के लिए कल्पना ने अपने गृह जिला शिवहर के तरियानी में स्थित YKJM कॉलेज में दाखिला भी लिया हुआ था।दरअसल, कल्पना ने इस परीक्षा के विज्ञान संकाय में भी टॉप किया है।। ऐसे में सवाल यह उठता है कि जब कल्पना पिछले 2 सालों से दिल्ली में आकाश इंस्टिट्यूट से मेडिकल की तैयारी कर रही थी, तो फिर वह शिवहर के कॉलेज के क्लास में न्यूनतम उपस्थिति कैसे दर्ज करा रही थी?जब इस पूरे मामले को लेकर स्कूल से बात की गई तो विवाद को बढ़ता देख बिहार स्कूल परीक्षा समिति के चेयरमैन आनंद किशोर ने एक झूठ बोला और इस पूरे विवाद को खत्म करने की कोशिश की आनंद किशोर ने आनन-फानन में यह ऐलान कर दिया कि बिहार के स्कूलों में किसी भी छात्र के लिए न्यूनतम उपस्थिति का कोई प्रावधान नहीं है। इसका मतलब यह हुआ कि बिहार के सरकारी स्कूल में या फिर बिहार के बोर्ड से मान्यता प्राप्त किसी भी स्कूल में आप केवल दाखिला ले लीजिए, क्लास मत करिए और आराम से बोर्ड की परीक्षा भी दे दीजिए और टॉप कर जाइए। बहराल, ये कोई पहली बार नहीं है जब बिहार के टॅापर को लेकर विवाद खड़ा हुआ हो। आपको बता दें कि पिछले 2-3 साल से बिहार में टाॅपर को लेकर धांधली लगातार देखी जा रही है।