... जानिए, 32 साल बाद अभिताभ बच्‍चन को किस बात का है अफसोस

नई दिल्ली (16 सितंबर): महानायक अमिताभ बच्चन का राजनीति के साथ भले ही कम समय वास्ता रहा हो लेकिन उनको अपने निर्वाचन क्षेत्र इलाहाबाद के लोगों से किए गए वादों को पूरा ना कर पाने का मलाल आज भी है। इसके कारण आज तक अमिताभ बच्चन उस दौर से उबर नहीं पाए हैं। इसका खुलासा उन्होंने शुक्रवार को जर्नलिस्ट शेखर गुप्ता और बरखा दत्त के प्रोग्राम 'ऑफ द कफ' में किया। गौरतलब है कि अमिताभ बच्चन ने अपने दोस्त और पूर्व पीएम राजीव गांधी के कहने पर 1984 में इलाहाबाद से लोकसभा चुनाव लड़ा था। इसमें उन्होंने हेमवतीनंदन बहुगुणा को बड़े अंतर से हराया था। हालांकि उनका राजनीतिक करियर थोड़े समय के लिए ही रहा क्योंकि उन्होंने तीन साल बाद ही इस्तीफा दे दिया था।

Big B को क्यों है वादों को पूरा न कर पाने का अफसोस... - अमिताभ के मुताबिक, मेरा राजनीति में सफर कम ही रहा। लेकिन इस बात का अफसोस है कि मैं इलाहाबाद की जनता से किए वादे पूरे नहीं कर पाया। - मैं इसके बारे में अक्सर सोचता हूं ऐसे कई वादे होते हैं जो एक व्यक्ति लोगों से वोट मांगते समय चुनाव प्रचार के दौरान करता है। - आज भी उन वादों को पूरा नहीं कर पाने की मेरी असमर्थता से मुझे दुख होता है, जिसका मुझे पछतावा है। - मैंने इलाहाबाद शहर और इसके लोगों से कई वादे किए थे लेकिन मैं उन्हें पूरा नहीं कर पाया। - जितनी मेरी क्षमता थी, मैंने वादों को पूरा करने की कोशिश की।  - लेकिन मैं जानता हूं इस बात को लेकर इलाहाबाद के लोगों में मेरे प्रति हमेशा नाराजगी रहेगी। - अमिताभ ने कहा, राजनीति में आना एक इमोशनल फैसला था।, मैं वहां जाकर दोस्त की मदद करना चाहता था।  - लेकिन बाद में अहसास हुआ कि वहां भावनाओं की कोई जगह नहीं है, मैं राजनीति में काम करने के लायक नहीं हूं, इसलिए छोड़ दिया।

बच्चन और गांधी परिवार अभी भी दोस्त... - जब यह सवाल पूछा गया कि राजनीति छोड़ने का असर बच्चन और गांधी परिवारों की दोस्ती पड़ा - बिग बी ने कहा, मुझे नहीं लगता कि राजनीति से वापस जाने का असर दोस्ती पर पड़ा।  - दोस्ती खत्म नहीं हुई, आप उस मुद्दे पर कैसे बात कर सकते हैं? हम अभी भी दोस्त हैं। - बिग बी ने कहा हम लोग कलाकार हैं, लोग हमें प्यार करते हैं, हमें उसके बदले कुछ देना होता है।  - जब हम राजनीति में आते हैं तो वहां आपको जनता के प्यार के बदले कुछ देना होता है। - जब आप कुछ पसंद नहीं करते तो आपको विपरीत प्रभावों का डर होता है।  - राजनेता बहुत ताकतवर लोग होते हैं। मुझे नहीं पता कि वो कैसे आपको नुकसान पहुंचा सकते है।

राजा और रंक की लड़ाई तक पहुंच चुकी थी बात... - 2008 में राहुल गांधी से बच्चन परिवार की शब्दों की लड़ाई काफी चर्चा में रही।  - विवाद तब उठा , जब जया बच्चन ने एक रैली में गांधी परिवार पर कॉमेंट किया।  - उन्होंने बताया कि किस तरह बोफोर्स मामले के दौरान गांधी परिवार ने बच्चन परिवार को धोखा दिया।  - जया बच्चन के इस बयान पर राहुल की फौरी प्रतिक्रिया आई।  - उन्होंने कहा कि जब गांधी परिवार मुसीबत में फंसा था, तो बच्चन परिवार ने उनका साथ नहीं निभाया।  - इसके बाद अमिताभ बच्चन का गांधी परिवार के बारे में जो बयान आया, वह काफी चर्चा में रहा।  - अमिताभ ने कहा, ‘वो राजा हैं, हम रंक, राजा चाहे, तो रंक से संबंध रख सकता।  - पर कोई रंक यह कहने का साहस नहीं जुटा सकता कि हम राजा से संबंध रखना चाहते हैं। - बाद में 2012 में अमिताभ ने एक इंटरव्यू में कहा, यह पहुंच का सवाल नहीं है। - हमने साथ समय बिताया है, संबंधों में ये चीजें मायने नहीं रखतीं। - निश्चित रूप से, मेरे मन में कोई बदलाव नहीं आया है, मैं उनका हमेशा सम्मान करूंगा।  - हम कुछ मौकों पर सार्वजनिक कार्यक्रमों के दौरान मिलते हैं। - कोई क्रोध, कोई आक्रोश नहीं है, हम अभी तक बहुत सामान्य हैं।