भारत के बाद भूटान भी देगा चीन को बड़ा झटका, अधर में लटका खरबों का प्रोजेक्ट

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न्यूज24 ब्यूरो, नई दिल्ली(14 अप्रैल): पड़ोसी देश चीन के बेल्ट ऐंड रोड फोरम की बैठक के न्योते को भारत ने ठुकरा दिया है वहीं सूत्रों से मिली सूचना के मुताबिक, भूटान बीआरआई फोरम बैठक में संभवतः शामिल नहीं होगा। चीन ने पिछले 12 महीनों में भूटान की नई सरकार के साथ अपनी बातचीत में तेजी लाई है ताकि यह थिंपू को भारत के प्रभाव से दूर कर सके। भूटान के चीन के साथ कोई कूटनीतिक संबंध नहीं हैं हालांकि वह अपनी अर्थव्यवस्था को बढ़ाने के लिए चीन को संभावित साझीदार के रूप में देख रहा है। इसे पता है कि फोरम में उसकी मौजूदगी भारत द्वारा संभवतः स्वीकार नहीं की जाएगी।

इसके पड़ोसी देशों मालदीव,श्रीलंका,नेपाल और बांग्लादेश ने शामिल होने की पुष्टि कर दी है। जानकारी के मुताबिक इस कार्यक्रम में 40 देशों के राष्ट्राध्यक्षों और सरकारों के शामिल होने की संभावना है। सूत्रों के मुताबिक चीन ने भूटान की नई सरकार को लुभाने की काफी कोशिश की थी, ताकि उसे भारत के प्रभाव से दूर ले जाया जा सके। भूटान के चीन के साथ राजनयिक संबंध नहीं है, हालांकि वह अपनी अर्थव्यवस्था को बढ़ाने के लिए चीन के साथ साझेदारी को बढ़ाना चाहता है। भूटान की सरकार का मानना था कि बीआरआई फोरम में उसकी मौजूदगी से भारत में अच्छा संकेत नहीं जाएगा। भूटान इससे पहले 2017 में भी इस बैठक का बायकॉट कर चुका है।

गौरतलब है कि भूटान ने 2017 में फोरम की पहली बैठक का बहिष्कार किया था और भारत के साथ खड़ा हुआ था। इस बार भी 2017 की तरह भूटान एकमात्र पड़ोसी देश है जो इस बैठक में शामिल किए जाने की चीन की कोशिश का विरोध कर रहा है। भारत बीआरआई को अपनी संप्रभुता के खिलाफ मानता है क्योंकि चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा पाक अधिकृत गिलगित-बाल्टीस्तान से होकर गुजरता है।

चीन के विदेश मंत्री ने एक बयान में कहा था, 'चीन भूटान के बेल्ट ऐंड रोड पहल में सक्रिय भागीदारी और चीन के विकास के लाभ को साझा करने का स्वागत करता है।' राजदूत लुओ ने फरवरी में भूटान का दौरा किया था जब उनके साथ चीन का सांस्कृतिक प्रतिनिधिमंडल भी था जिसने चीनी स्प्रिंग फेस्टिवल पर प्रस्तुति दी थी। वहीं, रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञ ब्रह्म चेलानी कहते हैं कि भारत भी भूटान की चीन के साथ सीमा विवाद पर होने वाली वार्ता को करीब से देखता है।