व्यवस्था की मार झेल रही हैं यह खिलाड़ी, भैंसों के साथ खेलती हैं फुटबाल!

नई दिल्ली (18 सितंबर): रियों में हमें सिर्फ दो मेडलों से संतोष करना पड़ा, लेकिन इसके पीछे सबसे बड़ी वजह हमारे देश में खेलों को लेकर सरकार की तरफ से ना दी जाने वाली सुविधाएं हैं। हाल ही में एक खबर हरियाणा के भिवानी में अलखपुरा गांव से आई हैं, जहां पर फुटबाल महिला खिलाड़ी भैंसों के साथ अभ्यास करती हुई, हमारी व्यवस्था को शर्मसार कर रही हैं।

बुनियादी सुविधाओं के अभाव में अलखपुरा गांव में स्कूल की लड़कियां चैंपियन बनने के लिए जबरदस्त मेहनत कर रही हैं। साल 2009 से लेकर अब तक यह लड़कियां अंडर-14, अंडर-17 और अंडर-19 श्रेणी में शानदार प्रदर्शन करती आई हैं। एक अंग्रेजी अखबार की खबर के अनुसार, साल दर साल उनके प्रदर्शन में सुधार हुआ है। इसका अंदाजा सुब्रतो मुखर्जी टूर्नामेंट में उनकी परफॉर्मेंस देखकर लगाया जा सकता है।

साल 2012 में प्रतिष्ठित सुब्रतो मुखर्जी अंतर्राष्ट्रीय टूर्नामेंट में उन्होंने तीसरा स्थान हासिल किया, 2013 में वे दूसरे नंबर पर आईं और 2015 में उन्होंने मणिपुर जैसी मजबूत टीम को हराकर टूर्नामेंट जीता था। इस साल नवंबर में होने वाले अंडर-17 सुब्रतो कप के लिए भी इन महिला फुटबॉल खिलाड़ियों ने क्वालिफाई कर लिया है।

फुटबॉल खेलने वाली ज्यादातर लड़कियां छोटे किसानों और दैनिक वेतनभोगियों की बेटियां हैं। बुनियादी प्रशिक्षण के लिए इन लड़कियों ने जुगाड़ को रास्ता बनाया है। खिलाड़ी ईंटों को मार्किंग कोन्स और डमबेल के तौर पर इस्तेमाल करती हैं, बांस से बनी सीढ़ी को फुर्ती के लिए इस्तेमाल किया जाता है। लड़कियों को स्पोर्ट्स किट और जूते फिजिकल ट्रेनिंग इन्सट्रक्टर गोर्धन दास देते हैं जिन्होंने 2006 में लड़कियों को फुटबॉल खिलवाने की शुरुआत की थी। इसके अलावा फंड के लिए गांव के लोग दान देते हैं।