भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के परिवार ने की शहीद के दर्जे की मांग

नई दिल्ली (23 मार्च): 23 साल की उम्र में वीर सपूत क्रांतिकारी शहीद-ए-आजम भगत सिंह, शिवराम राजगुरु और सुखदेव ने 23 मार्च 1931 में देश की खातिर हंसते-हंसते फांसी का फंदा चूम लिया था। 8 अप्रैल 1929 को भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने सेंट्रल असेंबली में बम फेंके।

घटना के बाद भगत सिंह वहां से भागने के बजाय वह खड़े रहे और खुद को अंग्रेजों के हवाले कर दिया। करीब दो साल जेल में रहने के बाद 23 मार्च 1931 को भगत सिंह को राजगुरु और सुखदेव के साथ फांसी पर चढ़ा दिया गया था। 

इस बीच भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के परिवार वाले आज (शुक्रवार, 23 मार्च) दिल्ली में भूख हड़ताल पर बैठ गए। 1931 में आज ही के दिन अंग्रेजों ने फांसी पर लटका दिया गया था। हालांकि केंद्र सरकार ने उन्हेंं अब तक शहीद का दर्जा नहीं दिया है।

#Delhi: Family members of Bhagat Singh, Rajguru and Sukhdev Thapar, demand the status of national martyr for them. #ShaheedDiwas pic.twitter.com/8AL4OKZmfK

— ANI (@ANI) March 23, 2018

लुधियाना में सुखदेव थापर के परिवार वालों ने मातृभूमि पर अपना सब कुछ न्यौछावर कर देने वाली इन तीनों महान विभूतियों को शहीद का दर्जा देने की मांग की है। सुखदेव के परिवार वालों का कहना है, 'इन्होंने अपनी जीवन अपने देश के लिए कुर्बान कर दिया, लेकिन आज़ादी के 70 साल बाद भी इन्हें शहीद का दर्जा नहीं दिया गया है।'