फांसी के 86 साल बाद भगत सिंह को निर्देष साबित करने के लिए पाकिस्तान में याचिका

लाहौर (12 सितंबर): भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की फैलती चिनगारी से घबराकर आज से तकरीबन 86 साल पहले ब्रितानी हुकुमत ने पुलिस अधिकारी जॉन पी सॉन्डर्स के हत्या के आरोप में भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को फांसी दे दिया था। लेकिन भगत सिंह को फांसी दिए जाने के 86 साल बाद स्वतंत्रता सेनानी शहीद भगत सिंह को निर्दोष साबित करने के लिए लाहौर उच्च न्यायालय में फिर से याचिका दायर की गई है। सात महीने पहले अदालत ने कहा था कि याचिका पर सुनवाई बड़े पीठ में हो। अदालत ने अभी तक बड़ी पीठ का गठन नहीं किया है।

भगत सिंह स्मारक फाउंडेशन के वकील इम्तियाज राशिद कुरैशी ने आवेदन देकर कोर्ट से याचिका पर जल्द सुनवाई करने का आग्रह किया। कुरैशी के मुताबिक उन्होंने अपनी याचिका में रजिस्ट्रार से आग्रह किया कि मामले की सुनवाई की तारीख तय करें और उम्मीद है कि इस महीने मामले पर सुनवाई होगी। साथ ही उन्होंने कहा कि सरकार को पत्र लिखकर शादमन चौक (लाहौर के मुख्य हिस्से) पर भगत सिंह की प्रतिमा लगाने की मांग भी की है। जहां उन्हें उनके दो साथियों के साथ फांसी पर लटकाया गया था।

आपको बता दें कि भगत सिंह को 23 साल की उम्र में ब्रिटिश शासकों ने 23 मार्च 1931 को फांसी पर चढ़ा दिया था। उन पर आरोप था कि उन्होंने ब्रिटेन की औपनिवेशिक सरकार के खिलाफ साजिश रची थी। इस सिलसिले में भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु पर ब्रिटिश पुलिस अधिकारी जॉन पी सॉन्डर्स की कथित तौर पर हत्या करने के लिए यह मामला दर्ज किया गया था।